RANCHI : झारखंड में नगर निकाय चुनाव संपन्न हो गया है. शहर की सरकार का स्वरूप सामने आ चुका है. 48 नगर निकायों ने अपना मेयर और अध्यक्ष चुन लिया है. इस बार का चुनाव ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से हुआ है. भाजपा इवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने का विरोध कर रही थी. भाजपा का कहना था कि चुनाव इवीएम से कराए जाने चाहिए. आधुनिक डिजिटल के इस दौर में हम बैलेट पेपर से चुनाव कर रहे हैं जो कि हमें और पीछे धकेल रहा है. बैलेट पेपर से चुनाव करना सुस्त और एक लंबी प्रक्रिया है इसमें परिणाम बहुत देरी से मिलता है. इसकी बानगी धनबाद नगर निगम चुनाव के परिणाम में देखने को मिली.
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बैलट पेपर से चुनाव कराने की एक और खामी सामने आई है. इन चुनावों में कई मतपत्र रद्द कर दिए गए हैं. लगभग 1.95 लाख से अधिक मतपत्रों को रद्द कर दिया गया. यह संख्या कुल पड़े वोटों का लगभग 7.26 फीसदी है. अर्थात 7.26 प्रतिशत वोट रद्दी की टोकरी में चले गए. चलिए समझते हैं ऐसा क्यों हुआ?
मतपत्रों के बारे में जानकारी का अभाव
वर्तमान में शहरी मतदाता बैलट पेपर की जगह ईवीएम से वोट करने में सहज हो गए हैं. ऐसे में बैलेट पेपर से वोट करना उन्हें थोड़ा असहज कर गया. महापौर या अध्यक्ष और वार्ड पार्षदों के लिए दो अलग-अलग मतपत्र थे. लेकिन कई मतदाताओं को इसकी जानकारी ही नहीं थी कि दोनों मतपत्रों में मोहर लगाना है. जिसके कारण कई मतदाताओं ने बिना मोहर लगाए ही मतपत्रों को बैलेट बॉक्स में डाल दिया.
एक ही जगह कई बार मोहर
इसके अलावा मतदाताओं द्वारा एक ही जगह कई बार मुहर लगाने कारण भी मतपत्र रद्द हुए. मुहर लगाने पर स्याही का रंग हल्का पड़ने पर मतदाताओं ने दोबारा गहरा निशान लगा दिया जिसके कारण मतपत्र रद्द हुआ.
निर्धारित बॉक्स के बजाय बाहर मोहर
कई मतदाताओं ने निर्धारित बॉक्स के बाहर या लाइन के बीच में मोहर लगा दिया जिसके कारण भी मतपत्र रद्द हुए. कई नए युवा मतदाता ऐसे थे जिन्हें बैलेट पेपर से मतदान करने की बिल्कुल जानकारी नहीं थी इसका भी परिणाम रहा कि कई मतपत्र रद्द हो गए.
राजनीतिक दलों की टिप्पणी
इस मुद्दे पर कांग्रेस और झामुमो ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं मतदाताओं में बैलेट पेपर से मतदान करने की आदत छूट गई है जिसके कारण बहुत बड़ी संख्या में वोट रद्द हुए हैं. मतदाताओं को जागरूक करने की आवश्यकता थी जो नहीं हो पाया.
वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश कहते हैं मतदाताओं ने तो मोहर लगाया लेकिन निर्धारित बॉक्स में लगाने के बजाय कहीं और लगा दिया. एवं मतपत्रों को सही से मोड़ कर रखने में की गई गलतियां हुईं जिसके कारण इतने सारे वोट रद्द हुए हैं. इस बारे में चुनाव आयोग को मतदाताओं को जागरूक करना चाहिए था.
