Nakib Ziya
RANCHI : झारखंड के पशुपालन विभाग में फर्जी वेतन निकासी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कर्मचारी मुनिंद्र कुमार ने रामगढ़ में पदस्थापन के दौरान वेतन मद में करीब 40 लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली, रांची ट्रेजरी में गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद जब रामगढ़ में जांच हुई तो पूरा खेल सामने आया, सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि एक क्लर्क का वेतन मुख्य सचिव से भी ज्यादा निकलता रहा लेकिन कई स्तर की जांच के बावजूद यह मामला लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया.
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कुल राशि में हेरफेर
जांच में खुलासा हुआ कि मुनिंद्र बेहद शातिर तरीके से वेतन बिल बनाता था जिसमें सभी कर्मचारियों का मूल वेतन, भत्ते और कुल भुगतान सही-सही दर्ज करता था ताकि किसी को शक न हो, लेकिन कुल राशि जोड़ते वक्त वह उसमें हेराफेरी कर रकम बढ़ा देता था जैसे 35 लाख की जगह 40 लाख दिखा देता था और DDO से हस्ताक्षर करवा लेता था, ऑनलाइन अपलोडिंग के दौरान भी वह आंकड़ों में बदलाव कर अतिरिक्त राशि को पास करवा लेता था जिससे बढ़ी हुई रकम उसके और उसके करीबी संजीव के खाते में चली जाती थी जबकि बाकी कर्मचारियों को उनका सही वेतन मिलता था, यही वजह रही कि लंबे समय तक यह गड़बड़ी सामने नहीं आई.
नए अधिकारी की जांच में मामला उजागर
जांच में यह भी पाया गया कि वह खुद ही बिल क्लर्क और हेड क्लर्क की भूमिका निभा रहा था और अक्सर होटवार में पोस्टिंग का हवाला देकर वहीं बिल तैयार करता था, सितंबर में नए अधिकारी के आने के बाद जब उससे acquittance roll और Cash Book मांगा गया तो उसने देने में टालमटोल की जिसके बाद आंतरिक जांच समिति बनाई गई, जांच में बैंक खाते और Cash Book के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया जिसके बाद उससे बिल बनाने का काम छीन लिया गया और जनवरी 2026 से उसका वेतन भी रोक दिया गया, अब यह मामला न सिर्फ एक बड़े घोटाले के रूप में सामने आया है बल्कि पूरे सिस्टम की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.
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