NEW DELHI : सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी के द्वारा दायर एक याचिका को खारिज करते हुए प्रशांत किशोर की पार्टी को फटकार लगाते हुए कहा है कि चुनावी प्रक्रिया में जब लोग आपको नकार देते हैं तब आप न्यायिक मंच का सहारा लेते हैं. चुनाव हारने के बाद अदालत का सहारा नहीं लेना चाहिए. अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए राज्य का हाईकोर्ट ही सही मंच है.
क्या था मामला
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में जन सुराज की तरफ से एक रिट याचिका दाखिल की गई थी जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई थी कि बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में नए लाभार्थियों को शामिल करना और उन्हें आदर्श आचार संहिता के दौरान राशि का भुगतान करना अवैध था. पार्टी की तरफ से पेश हुए वकील ने दलील देते हुए कहा कि बिहार में जिस योजना के अंतर्गत महिलाओं को भुगतान किया गया उसकी घोषणा चुनाव के एन मौके पहले की गई थी. एवं भुगतान उस वक्त किया गया जब आचार संहिता लागू था.
सीजेआई ने क्या कहा
सीजेआई की बेंच ने कहा कि हम मुफ्त वाली योजनाओं पर विचार करेंगे. लेकिन हमें उसकी सत्यता भी जांचनी होगी. सीजेआई ने कहा कि कोई यदि चाहे तो योजना को चुनौती दे सकता है लेकिन आप तो सीधे चुनाव को ही रद्द करने की मांग कर रहे हैं. न्यायालय ने याचिकाकर्ता को संबंधित राज्य के हाइकोर्ट जाने का सुझाव दिया. इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस ले ली.
इसे भी पढ़ें : झारखंड के 75 फीसदी स्थानीयों को उनका अधिकार देना ही होगा- हेमन्त सोरेन
