RANCHI : धनबाद के पूर्व विधायक और वर्तमान में मेयर प्रत्याशी चर्चित सिंह मेंशन के संजीव सिंह के भाई मनीष सिंह पर धनबाद पुलिस काफी मेहरबान है. 14 नवंबर को मनीष सिंह पर करोड़ों रुपए की मशीन चोरी करने के आरोप में एफआईआर दर्ज हुआ. दर्ज एफआईआर में कई ऐसी धाराएं हैं, जो गैरजमानती हैं. लेकिन मजाल है कि धनबाद पुलिस एक बार भी उससे पूछताछ कर ले. गिरफ्तारी की बात तो कोसों दूर है. जब से एफआईआर हुआ है, मनीष सिंह और उसके सहयोगी काफी सहजता से धनबाद में एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं. धनबाद में होने वाले हाईप्रोफाइल पार्टियों को अटेंड करते हैं और पुलिस उन्हें मुकदर्शक बनी देखती रहती है. पुलिस ने जो धाराएं मनीष सिंह पर लगायी है उनमें से एक धारा की सजा दस साल की है. जो कि गैरजमानती माना जाता है. यही धारा किसी आम आदमी पर लगी होती तो, वो आज जेल की कालकोठरी में होता. लेकिन धनबाद पुलिस की मेहरबानी से मनीष सिंह लगातार घूम रहा है. अब तो मनीष सिंह अपने बड़े भाई संजीव सिंह के मेयर चुनाव के लिए कैंपेनिंग कर रहा है. और पुलिस तमाशबीन बनी हुई है.
इसे भी पढ़ें : सिंह मेंशन के संजीव सिंह के भाई मनीष सिंह पर आउटसोर्स की मशीनरी चोरी करने का आरोप, थाने में एफआईआर दर्ज
कंपनी गयी कोर्ट की शरण में
धनबाद पुलिस की रवैया देखकर कंपनी सांई श्री इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड अब कोर्ट की शरण में गयी है. कंपनी के लोगों का कहना है कि पहले से ही कंपनी के लोग डरे हुए थे. किसी तरह हिम्मत जुटाकर मनीष सिंह जैसे बाहुबली के खिलाफ केस दर्ज कराया. लेकिन धनबाद पुलिस ने एक बार भी उन्हें गिरफ्तार करने या पूछताछ की जरूरत नहीं समझी. ऐसे में कोर्ट के अलावा अब कोई जगह कंपनी के लिए नहीं बचती है. कंपनी ने मनीष सिंह पर आरोप लगाया है कि मनीष सिंह ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर कंपनी की मशीनरी चोरी कर ली है. चोरी करने के बाद कुछ मशीनों को कटर से काटकर बाजार में बेच दिया, तो वहीं कुछ मशीन से वो अवैध उत्खनन का काम कर रहे हैं. धनबाद के तीसरा थाना में कंपनी के सीईओ मंथेना राजा गोपाला राजू ने इस मामले में नवंबर महीने में लिखित शिकायत की थी. पुलिस ने मामला दर्ज को कर लिया है, लेकिन कार्रवाई के नाम पुलिस मौन है.
क्या लगाया आरोप
कंपनी के सीईओ मंथेना राजा गोपाला राजू ने अपने लिखित आवेदन में कहा है कि झरिया इलाके में बीसीसीएल का आउटसोर्सिंग का काम कंपनी संभाल रही थी. लेकिन अचानक उत्खनन का काम 2016 में स्थगित हो गया. 28 नवंबर 2017 को उनकी कंपनी की मशीन चोरी हो गई. उनका कहना है कि जब वह 28 नवंबर को वापस अपनी मशीन लेने पहुंचे तो देखा कि वहां कोई मशीन नहीं है. सभी मशीन चोरी हो चुकी है. फिर काफी खोजने के बाद उन्हें भूली थाना क्षेत्र में 17 फरवरी 2021 को मशीनें मिली. आगे उन्होंने कहा कि जब मशीनों को अच्छी तरह से देखा तो पाया कि कई मशीनों के चेचिस और इंजन नंबर से छेड़छाड़ की गई थी. कई मशीन को गैस कटर से कटकर टुकड़ों में तब्दील कर दिया गया था.
इसे भी पढ़ें : झामुमो-भाजपा गठबंधन, इन तीन घटनाओं से समझें कि झारखंड में सत्ता की राजनीति सच में बदलेगी या फिर यह सिर्फ बुलबुला मात्र है
कंपनी के कर्मियों को दी जान से मारने की धमकी
कंपनी के सीईओ ने आरोप लगाया है कि जब वह मशीन देखने के लिए भूली क्षेत्र में पहुंचे तो इस वक्त सत्येंद्र कुमार सिंह और संतोष कुमार सिंह मौके पर आए और दावा किया कि यह मशीन है मनीष सिंह उर्फ सिद्धार्थ गौतम की है. और इसे यहां शैलेंद्र सिंह उसे छोटू सिंह ने पहुंचाया है. दोनों आरोपियों ने खुद को मशीनों का कस्टोडियन बताया. साथ ही कंपनी के सीईओ और वहां मौजूद कंपनी के स्टाफ को जान से मारने की धमकी दी और दूसरे मशीन को देखने से जबरन रोका.
कंपनी कैंप पहुंचकर मशीनें लूटी और दी धमकी
आगे कंपनी के सीईओ लिखते हैं कि 5 नवंबर को रात लगभग 10 बजे शैलेंद्र सिंह, सत्येंद्र कुमार सिंह, संतोष कुमार सिंह और मनीष सिंह के साथ लगभग 10 और हथियारबंद लोग उनके कैंप पहुंचे. मशीनों को हथियार के बल पर जबरन लूट लिया. कंपनी कर्मी जिंकल जगदीश्वर रेड्डी और अन्य कर्मचारियों को हत्या की धमकी देकर चुप रहने को मजबूर किया. डर और दबाव की वजह से उन्होंने सालों तक घटना को सार्वजनिक नहीं किया. कंपनी के सीईओ आगे अपनी शिकायत में लिखते हैं की लूट में शामिल आरोपियों ने कई मशीनों को स्क्रैप मार्केट में अवैध रूप से बेच दिया. शेष मशीनों को गैरकानूनी खनन कार्यों में इस्तेमाल किया. कंपनी के सीईओ का कहना है कि जब भी वह मशीन वापस करने की बात करते हैं तो उन्हें डराया और धमकाया जाता है साथ ही जान से मारने की धमकी दी जाती थी.
इसे भी पढ़ें : साढ़े तीन महीने बाद गिरिडीह पहुंचा प्रवासी मजदूर का शव, परिजनों ने किया शव लेने से इनकार
