BOKARO : शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में झारखंड की समृद्ध लोक-संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला. कार्यक्रम के दौरान संथाली नृत्य (जागो जगाओ ग्रुप) द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाट्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरे आयोजन की भव्यता में चार चांद लगा दिए.

विनोद कुमार एवं उनके समूह की प्रस्तुति ने दर्शकों को झारखंड की मिट्टी, उसकी परंपराओं और सांस्कृतिक चेतना से गहराई से जोड़ दिया. मंच पर प्रस्तुत नृत्य-नाट्य के माध्यम से झारखंड की भूमि, खेती से जुड़ाव, अपनी पहचान को संजोए रखने और शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने की परंपरा को प्रभावशाली ढंग से उकेरा गया.
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कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि “सोनार झारखंड” की संकल्पना को साकार करने में नृत्य और कला की अहम भूमिका है, जो समाज को ऊर्जावान, जागरूक और संगठित बनाती है. झारखंडी मंदर की थाप ने अंग्रेजों के विरुद्ध हुए संघर्ष की भावना को पुनः जीवंत कर दिया.
भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और आंदोलन पर आधारित नृत्य-नाट्य ने मंच पर ऐसा भावनात्मक वातावरण रचा कि दर्शक दीर्घा में उपस्थित लोग भावविभोर हो उठे. पूरे सभागार में देशज संस्कृति, संघर्ष और स्वाभिमान की चेतना गूंजती रही.

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इस सांस्कृतिक प्रस्तुति ने न केवल झारखंडी संस्कृति को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, बल्कि नई पीढ़ी को राज्य की ऐतिहासिक विरासत, संघर्षपूर्ण परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का भी कार्य किया.
उल्लेखनीय है कि शब्द सरिता महोत्सव का आयोजन 07 से 08 जनवरी 2026 तक शिबू सोरेन स्मृति भवन (टाउन हॉल), बोकारो में किया गया, जिसका संदेश है – “हर किताब एक नई दिशा दिखाती है…”
