BOKARO : जिला प्रशासन बोकारो की पहल पर शिबू सोरेन स्मृति भवन सभागार में आयोजित शब्द सरिता महोत्सव के अंतर्गत भव्य कवि सम्मेलन साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों का एक जीवंत मंच बनकर उभरा. कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ देश के प्रख्यात कवियों ने अपनी सशक्त एवं भावनात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा एवं पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह ने कवियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया.

शारदे वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ कवयित्री पद्मिनी शर्मा द्वारा माँ शारदे की वंदना से हुआ. आध्यात्मिक और साहित्यिक ऊर्जा से परिपूर्ण इस आरंभ ने पूरे वातावरण को भावविभोर कर दिया. देश के प्रसिद्ध लेखक-कवि निलोत्पल मृणाल ने कहा कि साहित्य समाज को नई दृष्टि देता है और ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की.
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किसान और बचपन पर पढ़ी भावनात्मक कविताएं
प्रसिद्ध कवि नीलोत्पल मृणाल ने किसान की मेहनत, मिट्टी और श्रम पर आधारित कविता – “हम आकाश में गेहूँ बोएंगे…” के माध्यम से ग्रामीण जीवन की पीड़ा और स्वाभिमान को स्वर दिया. वहीं, बचपन के खोते संसार पर आधारित कविता – “कहां गया दिन वो सलोना रे…” ने श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे केवल वीडियो देखकर नहीं, बल्कि सकारात्मक वातावरण में अध्ययन करें.
आयोजित कवि सम्मेलन में कविता केवल शब्दों का सौंदर्य नहीं रही, बल्कि मानवीय भावनाओं, जीवन-संघर्ष और सामाजिक यथार्थ का सशक्त माध्यम बनकर उभरी. प्रख्यात कवियों की रचनाओं ने श्रोताओं को भावनात्मक, वैचारिक और आत्ममंथन की यात्रा पर ले जाने का कार्य किया.

मानवीय संवेदनाओं पर आधारित गीत
कवि द्वारा प्रस्तुत तीसरा गीत मानवीय संवेदना और जीवन-दर्शन पर केंद्रित रहा. “हे जादूगर, तुम्हारा घर कहाँ है?” और “दुनिया मिट्टी का एक ढेर है…” जैसी पंक्तियों ने जीवन, माया और सत्ता के भ्रम पर गहरे प्रश्न खड़े किए. “एक दिन सिर पर ताज होगा…” जैसी पंक्तियों ने संघर्ष और आशा को प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया.
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नौकरीपेशा जीवन पर व्यंग्यात्मक गीत
कार्यक्रम में नौकरीपेशा जीवन की विडंबनाओं पर आधारित कवि नीलोत्पल मृणाल का व्यंग्यात्मक गीत विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. “कॉलेज के दिन याद करूँ तो…” और “सिकंदर नौकरी की वजह से हार गया…” जैसी पंक्तियों ने युवावस्था के सपनों और वर्तमान की कठोर सच्चाइयों को उजागर किया, जिस पर श्रोताओं ने तालियों के साथ गहरी सहमति जताई.
संघर्ष, प्रेम और बलिदान के प्रतीक बने ‘वे लड़के’
कवि की प्रस्तुति का सबसे मार्मिक हिस्सा उन युवाओं पर केंद्रित रहा, जिन्होंने अपने जीवन को संघर्ष की भट्ठी में तपाया. “वे लड़के जिन्होंने स्कूल की दीवारों पर दिल बनाए थे…” और “उड़ते हुए तीर को खुद पर ले लिया…” जैसी पंक्तियों ने प्रेम, साहस और बलिदान की गाथा कह दी.
रजत नाथ की कविताओं ने बांधा समां
स्थानीय पत्रकार-कवि रजत नाथ ने “कभी दुखों का पहाड़ है, कभी आँसुओं का सागर…” और “बेसिन के शीशे पर चिपकी बिंदी…” जैसी रचनाओं से जीवन के सूक्ष्म भावों को मंच पर जीवंत कर दिया, जिसे श्रोताओं ने तालियों की गूंज के साथ सराहा.
श्रृंगार और वसंत की सुगंध से महकी कविता
बोकारो निवासी कवयित्री गीता कुमारी ने नववर्ष और बसंत ऋतु पर आधारित श्रृंगार रस की कविता – “जो तुम संग हो साजन मेरे, मेरा हर रंग बसंती है…” प्रस्तुत कर प्रेम, सौंदर्य और उल्लास की अनुभूति कराई.
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प्रशासनिक पदाधिकारी भी बने कवि
डीसीएलआर चास प्रभास दत्ता ने संघर्ष और आशा से भरी रचना प्रस्तुत की. वहीं, जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी शक्ति कुमार ने दैनिक जीवन से जुड़ी संवेदनशील कविताओं का पाठ कर खूब तालियां बटोरीं.
अमन अश्कर की कविताओं ने सोचने पर किया मजबूर
कवि अमन अश्कर की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदना मुखर रूप से उभरी. “लोहे की कीमत तो कमा ली, लेकिन सोना गंवा दिया…” जैसी पंक्तियों ने श्रोताओं को गहन चिंतन में डुबो दिया.
श्रृंगार एवं सामाजिक चेतना से भरी प्रस्तुति
कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने प्रेम, संस्कृति और नारी संवेदना पर आधारित कविताओं से मंच को भावनाओं से भर दिया. बेटियों की शक्ति, मीरा की आस्था और भारतीय संस्कृति पर आधारित पंक्तियों ने गहरा प्रभाव छोड़ा.
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बालिकाओं की प्रस्तुति भी रही आकर्षण का केंद्र
चिन्मय विद्यालय की शिक्षिका ज्योति दूबे और छात्रा वैष्णवी ने जीवन की हार-जीत और संघर्ष को पक्षी की उड़ान के प्रतीक के माध्यम से प्रस्तुत कर खूब सराहना बटोरी.
यह कवि सम्मेलन उपस्थित श्रोताओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया. कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया कि कविता आज भी समाज को जोड़ने और सोचने की दिशा देने की अद्भुत शक्ति रखती है.
समापन और सम्मान
इस अवसर पर उपायुक्त अजय नाथ झा, उनकी धर्मपत्नी प्रतिमा झा, पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह, उनकी धर्मपत्नी दिव्या शर्मा, एवं उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति-चिन्ह भेंट किए. कार्यक्रम के अंत में शताब्दी मजूमदार ने धन्यवाद ज्ञापन दिया. मौके पर सभी जिला स्तरीय पदाधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे.
