Seraikela Kharsawan : मई 2021 में रांची की कांची नदी पर बना हाराडीह-बुढ़ाडीह पुल अवैध बालू खनन के कारण ध्वस्त हो गया था. करोड़ों रुपये की लागत से बना पुल कुछ ही वर्षों में धराशायी हो गया और सवाल उठा कि आखिर नदी के तल से छेड़छाड़ का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है. अब वही खतरा सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत तिरुलडीह क्षेत्र में मंडराता दिख रहा है, जहां स्वर्णरेखा नदी में पुल के बेहद करीब खुलेआम अवैध बालू खनन जारी है.

प्रशासनिक सख्ती के दावों के बीच तिरुलडीह थाना क्षेत्र की जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है. उपायुक्त (DC), अनुमंडल पदाधिकारी (SDO/SDM) और जिला खनन पदाधिकारी (DMO) की निगरानी में चल रहे जिले में अवैध बालू का कारोबार बेखौफ फल-फूल रहा है. हालात ऐसे हैं कि यह धंधा प्रशासन की नाक के नीचे संचालित हो रहा है और कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन दिए जा रहे हैं.
सरायकेला-खरसावां के चांडिल अनुमंडल के तिरुलडीह और ईचागढ़ थाना क्षेत्र में स्वर्णरेखा तट पर अवैध बालू खनन, प्रशासन मौन!@HemantSorenJMM @deepakbiruajmm @roysaryu @JharkhandCMO @DCseraikella @sp_saraikela @SaraikelaPolice @IPRDSARAIKELLA_
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नियम कहता है कि किसी भी पुल के 500 मीटर के दायरे में बालू उठाव प्रतिबंधित है, लेकिन तिरुलडीह में पुल से महज 50 मीटर की दूरी पर दिनदहाड़े सैकड़ों ट्रैक्टर नदी का सीना चीर रहे हैं. इंजन चालित वाहनों के नदी में उतरकर बालू लोड करने पर भी रोक है, फिर भी ट्रैक्टर और अन्य वाहन सीधे नदी के भीतर जाकर बालू भर रहे हैं.

स्वर्णरेखा नदी का सीना चीरकर बालू निकाल रहे माफिया, सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन और तिरुलडीह थाना प्रभारी मौन, आखिर क्यों?@HemantSorenJMM @deepakbiruajmm @JharkhandCMO @DCseraikella @sp_saraikela @SaraikelaPolice @IPRDSARAIKELLA_ #SwarnarekhaRiver#BaluMafia… pic.twitter.com/RsMX61NJLO
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तिरुलडीह थाना क्षेत्र बना बालू माफियाओं का सबसे सुरक्षित ठिकाना, बिना रोक-टोक फल-फूल रहा अवैध कारोबार
तिरुलडीह थाना क्षेत्र अब बालू माफियाओं का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन चुका है, जहां बिना रोक-टोक यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है. पूरे क्षेत्र में दर्जनों अवैध बालू भंडारण स्थल मौजूद हैं. कई लाख सीएफटी (CFT) बालू अवैध रूप से जमा कर रखा गया है. रातभर ढुलाई जारी रहती है और बिना नंबर प्लेट के ट्रैक्टर मुख्य सड़कों पर खुलेआम दौड़ते नजर आते हैं. तिरुलडीह थाना से महज डेढ़ किलोमीटर के दायरे में यह पूरा नेटवर्क सक्रिय है.

लगातार हो रहे अवैध खनन से नदी की धारा और तल में बदलाव हो रहा है, जिससे पुल की नींव पर खतरा गहराने की आशंका है. क्या प्रशासन किसी और हाराडीह-बुढ़ाडीह जैसी घटना का इंतजार कर रहा है? इधर, सड़क किनारे बसे घरों की हालत भी बदतर हो चुकी है. रात-दिन उड़ती धूल से घर धूलमय हो गए हैं, प्रदूषण चरम पर है और स्थानीय लोग परेशान हैं. लेकिन जिम्मेदार विभाग अब भी मौन है.
SDO बोले चुनावी कार्यों में व्यस्त हैं, DMO ने कहा “ऐसा हो ही नहीं सकता” – अवैध खनन पर प्रशासनिक जवाबों ने खड़े किए गंभीर सवाल
जब इस मामले में चांडिल के अनुमंडल दंडाधिकारी(SDO) से संपर्क किया गया तो उन्होंने चुनावी कार्यों में व्यस्त होने की बात कहकर DMO को निर्देश देने की बात कही. वहीं जिला खनन पदाधिकारी DMO ने कहा कि कई अवैध भंडारण जब्त किए गए हैं और लोकेशन मिलने पर जांच कराई जाएगी. पुल के पास हो रहे अवैध उठाव पर उनका जवाब था – “ऐसा हो ही नहीं सकता, इंस्पेक्टर वहीं है।” वीडियो होने की जानकारी देने पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा – “मैं देखता हूं.”
अब सवाल सीधा है – अगर अधिकारियों को अपने ही क्षेत्र में चल रहे इस व्यापक अवैध कारोबार की जानकारी नहीं है, तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है. और यदि जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, तो मामला और भी खतरनाक है.

क्या अवैध बालू से होने वाली कमाई का हिस्सा नीचे से ऊपर तक पहुंच रहा है? क्या इसी कारण सख्ती के बजाय चुप्पी साध ली गई है?
झारखंड में बालू का अवैध कारोबार पुराना खेल है, लेकिन तिरुलडीह में जिस तरह पुल के नीचे से जमीन खिसकाई जा रही है, वह आने वाले समय का बड़ा खतरा संकेत दे रहा है. अब देखना है कि सरायकेला-खरसावां प्रशासन समय रहते जागता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई की औपचारिकता निभाई जाएगी.
