
रांची | पेसा नियमावली को लेकर भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा द्वारा लगाए गए आरोपों को झारखंड मुक्ति मोर्चा ने सिरे से खारिज करते हुए उन्हें निराधार, भ्रामक और राजनीतिक हताशा से प्रेरित बताया है। पार्टी ने कहा कि भाजपा को आदिवासी हितों की याद आज आ रही है, जबकि उसके लंबे शासनकाल में पेसा कानून को लागू करने की नीयत तक नहीं दिखी।
झामुमो का कहना है कि वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद न तो पेसा के नियम बनाए गए और न ही ग्राम सभाओं को वास्तविक अधिकार दिए गए। अर्जुन मुंडा स्वयं लंबे समय तक मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रहे, लेकिन उनके कार्यकाल में पेसा कानून केवल कागजों तक सीमित रहा।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि हेमंत सोरेन सरकार ने वह काम किया है, जो दशकों तक लंबित रहा, और वह भी पूरी तरह संवैधानिक दायरे में रहकर। पेसा नियमावली में ग्राम सभा की भूमिका को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक सशक्त किया गया है। परंपरा, रूढ़ि और स्थानीय स्वशासन की भावना को संविधान के अनुरूप स्पष्ट और व्यावहारिक स्वरूप दिया गया है।झामुमो ने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर भ्रम फैला रही है, ताकि आदिवासी समाज को गुमराह किया जा सके। नियमावली में ग्राम सभा सर्वोच्च है और आगे भी सर्वोच्च रहेगी। संवैधानिक प्रक्रिया से बनी नियमावली को “कोल्ड ब्लडेड मर्डर” कहना भाजपा की संवैधानिक अज्ञानता और राजनीतिक कुंठा को दर्शाता है।
पार्टी ने कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक आदिवासी अधिकारों की अनदेखी की, उन्हें आज बड़े-बड़े शब्दों के इस्तेमाल का नैतिक अधिकार नहीं है। हेमंत सोरेन सरकार की मंशा शुरू से स्पष्ट रही है— आदिवासी अस्मिता, परंपरा और स्वशासन को संवैधानिक संरक्षण देना।
