RANCHI : झारखंड में विधायक-सांसदों को सरकार की ओर से 20-20 डिसमिल जमीन आवंटन के संबंध में ये खबर छन कर आ रही है कि अभी जमीन आवंटन में समय लगेगा. विधायकों को जमीन आवंटन पर सरकार के आश्वासन के बावजूद रजिस्ट्री पोर्टल नहीं खुलने का मुद्दा भाजपा विधायक सीपी सिंह और नवीन जायसवाल ने उठाया था. सरकार और से संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने स्पष्ट करते हुए सदन में कहा है कि कांके अंचल वाली जमीन जो आदिवासी परिवारों को दी गई है उस पर विधायक और सांसदों के घर नहीं बनाए जाएंगे. सरकार 2 महीने के अंदर विवाद मुक्त वैकल्पिक जमीन की तलाश करेगी.
जमीन की बन्दोबस्ती भूमिहीन आदिवासियों के नाम पर
मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सदन में बताया कि विधायकों और सांसदों के आवास निर्माण के लिए झारखंड विधायक एवं सांसद गृह निर्माण स्वावलंबी सरकारी समिति लिमिटेड की ओर से 28 जून 2016 को राजस्व विभाग से जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था. जिसके बाद कांके अंचल की लगभग 35 एकड़ गैर मजरूआ मालिक परती कदिम भूमि प्रस्तावित की गई थी. राज्य सरकार ने 2017 में भूमि हस्तांतरण को मंजूरी देते हुए इसके लिए 1 करोड़ 70 लाख 62 हजार 500 रुपए भी जमा कर दिए. बाद में पता चला कि वर्ष 1970-71 में इस जमीन की बंदोबस्ती भूमिहीन आदिवासी परिवारों के नाम पर की गई थी.
तत्कालीन भाजपा सरकार पर जबरन बन्दोबस्ती रद्द करने का आरोप
संसदीय कार्य मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि तत्कालीन रघुवर दास के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने उन आदिवासी परिवारों से बिना सहमति के जमीन की बंदोबस्ती को रद्द करके विधायक और सांसदों के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूरा किया. 1970-71 में इस जमीन की बंदोबस्ती बंधना करमाली, जुड़वा करमाली, चरकू करमाली, ललकू मुंडा, राजू मिरदाहा सहित अन्य के नाम पर की गई थी.
जबरन घर बनाना मानवता के खिलाफ
उक्त जमीन को अधिकारियों द्वारा कब्जा दिलाने के प्रयास का ग्रामीणों के द्वारा विरोध किया गया. जिसके फलस्वरूप सरकार ने कहा है कि अब विवाद मुक्त जमीन की तलाश की जाएगी, मंत्री ने बताया कि आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर घर बनाना मानवता के खिलाफ होगा. सदन से इस विषय पर राय मांगने पर सभी सदस्यों ने सहमति जताते हुए तय किया कि इस जमीन पर विधायक सांसदों के आवास नहीं बनेंगे कोई विवाद मुक्त जमीन की तलाश की जाएगी.
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