Akshay Kumar Jha
NEW DELHI : वेदांता लिमिटेड के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा है कि मौजूदा वैश्विक और geo-political अस्थिरता के दौर में भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत तेल और गैस जरूरतें आयात से पूरी करता है, जिससे geo-political जोखिमों के कारण देश की ऊर्जा सुरक्षा संवेदनशील बनी रहती है. ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद आवश्यक है.
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता तेल और गैस बाजार है और अगले 20 वर्षों तक इसकी मांग बढ़ती रहेगी. मौजूदा geo-political परिस्थितियों को देखते हुए देश के पास मौजूद करीब 300 अरब बैरल तेल और गैस के बराबर संसाधनों की संभावनाओं का उपयोग करना जरूरी है. साथ ही भारत के पास कुशल मानव संसाधन और स्टार्टअप्स की मजबूत ताकत भी मौजूद है.
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अनिल अग्रवाल ने कहा कि इस उद्योग की बुनियाद exploration यानी खोज है. अमेरिका का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि exploration को उद्यमियों के लिए खोलने से वहां घरेलू उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी हुई, जिससे geo-political निर्भरता भी घटी.

उन्होंने कहा, “हम आयात की तुलना में लगभग आधी लागत पर तेल और गैस का उत्पादन कर सकते हैं. अब तक इस उद्योग ने सरकारी खजाने में करीब 40 अरब डॉलर का योगदान दिया है.”
उन्होंने चिंता जताई कि भारत में exploration के लिए लाइसेंसों की संख्या बहुत कम है, जिससे निवेश का माहौल प्रभावित होता है. घरेलू उत्पादन से न केवल geo-political जोखिम कम होंगे, बल्कि रोजगार सृजन होगा और देश की अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
अनिल अग्रवाल ने बताया कि वेदांता लिमिटेड का लक्ष्य उत्पादन को पांच गुना बढ़ाने का है, जबकि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को कुल उत्पादन दस गुना बढ़ाना होगा. उन्होंने सरकार से स्थिर और सहयोगी नीति वातावरण बनाने की अपील की, ताकि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके.
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