RANCHI : झारखंड के नगर निगम चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए 1978 से पहले के भू-अभिलेख के आधार पर बना जाति प्रमाण पत्र ही मान्य होगा. इस नियम के कारण कई उम्मीदवार जो ओबीसी आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते थे वह हैरान-परेशान होकर इधर-उधर की दौड़ लगा रहे हैं.
दरअसल झारखंड के रांची, धनबाद, बोकारो और जमशेदपुर में अन्य राज्यों से आकर बसने वालों की अच्छी-खासी आबादी रहती है. जो 1978 से पहले या उसके बाद आकर बसे. 1978 से पहले आकर बसने वाले लोगों के पूर्वजों के नाम यदि यहां के भू-अभिलेख में दर्ज हैं तो उनका जाति प्रमाण पत्र मान्य है. लेकिन जिनके पूर्वज 1978 के बाद आकर यहां बसे उनके लिए ओबीसी आरक्षित सीटों से चुनाव लड़ पाना असंभव है.
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हालांकि कुछ ऐसे भी झारखंडी मूल के लोग हैं जो भूमिहीन हैं या 1978 के पहले के भू-अभिलेख में उनकी जाति अस्पष्ट है. इन परिस्थितियों में अंचलाधिकारी या सक्षम पदाधिकारी स्थलीय निरीक्षण कर उनकी जाति का निर्धारण करेंगे एवं जाति प्रमाण पत्र निर्गत करेंगे.
झारखंड सरकार के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने इस आशय का पत्र जारी करते हुए कहा कि आमतौर पर भू-अभिलेख/रिकॉर्ड ऑफ राइट्स/भूमि निबंधन कागजात के आधार पर जाति का निर्धारण किया जाता है लेकिन आवेदक यदि भूमिहीन है या इन अभिलेखों में जाति की स्थिति संशय पूर्ण है तो ऐसी स्थिति में स्थानीय जांच की प्रक्रिया अपना कर जाति का निर्धारण करते हुए जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जा सकता है.
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