RANCHI : झारखंड में बिना लाइसेंस के चल रहे अस्पतालों को लेकर झारखंड सरकार को हाईकोर्ट से फटकार लगी है. झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट, 2010 को सख्ती से लागू करने का निर्देश सरकार को दिया है. इस बाबत स्वास्थ्य निदेशक को निर्देश देते हुए अदालत ने नियमों को लागू करने में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए 4 महीने में रिपोर्ट देने को कहा है.
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कानून का अनुपालन प्रभावी ढंग से हो
सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि अधिनियम और कानून स्पष्ट बना हुआ है लेकिन उसके अनुपालन में ढ़िलाई बरत रही है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने कहा कि यदि कानून बनने के बाद भी उसका अनुपालन प्रभावी ढंग से नहीं होता है तो यह व्यवस्था को कमजोर को करता है.
कितने अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के
हाईकोर्ट ने इस मामले में पहले भी सरकार से जानकारी मांगी थी कि राज्य में कितने अस्पताल क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट के तहत रजिस्ट्रेशन के बिना चल रहे हैं. और उनके खिलाफ क्या-क्या कदम उठाया गया है. साथ ही सरकार और उनके विभाग द्वारा संचालित ऐसे स्वास्थ्य केंद्रों की सूची भी मांगी गई थी जो अधिनियम और कानून के तहत रजिस्टर्ड नहीं है. इसके अलावा अदालत ने सरकार से यह भी जानना चाहा था कि जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में किस प्रकार की चिकित्सा सेवा उपलब्ध है, उनमें क्या कमी है. लेकिन हाईकोर्ट के अनुसार सरकार ने अपने हलफनामे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी है.
कोई भी अस्पताल बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित न हो
कोर्ट ने सरकार को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि राज्य में कोई भी अस्पताल, तय अधिनियम व झारखंड राज्य क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट नियम, 2013 के तहत रजिस्ट्रेशन के बिना संचालित नहीं हो. अदालत ने सरकार को यह भी निर्देश दिया कि जिला पंजीकरण प्राधिकरण प्रभावी ढंग से कार्य करे और अस्पतालों वा क्लिनिकों का नियमित जांच किया जाए.
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