KOLKATA : कोलकाता की सियासी गलियों में गुरुवार की सुबह अचानक उस वक्त हलचल तेज हो गई जब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की टीम ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी I-PAC के कोलकाता स्थित दफ्तर में छापेमारी शुरू कर दी. यह वही संस्था है जो देश के बड़े राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करती है. जैसे ही यह खबर बाहर आई राजनीतिक माहौल गरमा गया और कुछ ही देर में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC के दफ्तर पहुंच गईं. मुख्यमंत्री का इस तरह मौके पर पहुंचना इस कार्रवाई को और ज्यादा संवेदनशील और चर्चित बना गया. ममता बनर्जी ने इसे लोकतंत्र और राजनीति में हस्तक्षेप बताया और कहा कि उनकी पार्टी के गोपनीय दस्तावेजों को निशाना बनाया जा रहा है. इसी के साथ यह सवाल भी उठने लगा कि आखिर ईडी की यह कार्रवाई क्यों और किस मामले से जुड़ी है.

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सूत्रों के मुताबिक ईडी की यह छापेमारी कोई नई जांच नहीं बल्कि एक पुराने कोयला तस्करी मामले से जुड़ी हुई है. यह मामला वर्ष 2021 का बताया जा रहा है जब ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड क्षेत्र में कोयला चोरी और तस्करी को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इससे पहले वर्ष 2020 में सीबीआई ने भी इस मामले में जांच शुरू की थी. जांच में सामने आया था कि 2015 से 2020 के बीच करीब 36 लाख मीट्रिक टन कोयले की अवैध तस्करी हुई जिससे सरकार को लगभग 1340 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के आसनसोल इलाके के कुनुस्टोरिया और कजोरा क्षेत्र से जुड़ा है. इसी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करते हुए ईडी को कुछ ऐसे दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिले जिनका संबंध I-PAC और उससे जुड़े कुछ लोगों से बताया जा रहा है. इसी आधार पर ईडी की दिल्ली टीम ने कोलकाता में छापेमारी की.
ममता बनर्जी ने इस पूरे मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी सीधा हमला बोला. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा अपने पार्टी कार्यालयों पर भी इसी तरह ईडी की छापेमारी करवाएगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि एक तरफ मतदाता सूची में गड़बड़ी की बातें सामने आ रही हैं और दूसरी तरफ संवेदनशील राजनीतिक डेटा को इकट्ठा करने की कोशिश हो रही है. उल्लेखनीय है कि I-PAC ने 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत में अहम भूमिका निभाई थी और आने वाले समय में भी पार्टी की रणनीति तैयार करने में यह संस्था सक्रिय है.
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