Nakib Ziya
BOKARO : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने विस्थापितों के मुद्दे पर बड़ा तेवर दिखाते हुए बोकारो से निर्णायक लड़ाई का ऐलान किया है. रामगढ़ के घाटो से लेकर बोकारो तक उनके तूफानी दौरे में उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब यह लड़ाई आर-पार की होगी.
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सुबह घाटो पहुंचकर सारूबेड़ा जाहेरस्थान में पूजा-अर्चना के बाद चम्पाई सोरेन ने मजदूरों, किसानों और विस्थापितों के अधिकार की लड़ाई को मुकाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया. इसके बाद चार नंबर मोड़ पर टाटा स्टील और सीसीएल से जुड़े विस्थापितों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हर स्तर पर सहयोग का भरोसा दिया.
उन्होंने अपने पुराने आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि संघर्ष के बल पर ही हजारों आदिवासी और मूलवासी मजदूरों को स्थायी नौकरी मिली थी और अब एक बार फिर उसी तरह की लड़ाई लड़ी जाएगी.

ललपनिया स्थित लुगुबुरु घांटाबाड़ी धोरोम गाढ़ में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की सुख-शांति की कामना की और विस्थापितों के हक के लिए आशीर्वाद मांगा.
बोकारो पहुंचने के दौरान बालीडीह टॉल ब्रिज, एलएच मोड़ और बिरसा चौक समेत कई स्थानों पर उनका जोरदार स्वागत हुआ. बिरसा चौक पर भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि देने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने आंदोलन की रूपरेखा रखी.

चम्पाई सोरेन ने कहा कि सरकार और कंपनी प्रबंधन के पास डेढ़ महीने का समय है. यदि इस अवधि में अप्रेंटिस युवाओं को नौकरी और विस्थापितों के मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो राज्यव्यापी जनआंदोलन शुरू किया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह आंदोलन विस्थापितों का होगा और इसमें वही लोग शामिल होंगे जो उनके दर्द को समझते हैं.
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उन्होंने जादूगोड़ा स्थित यूसीआईएल और ईचा-खरकाई डैम का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके नेतृत्व में हुए आंदोलनों ने पहले भी नियम बदलवाए और गांवों को डूबने से बचाया है.
मोदीडीह गांव में विस्थापितों ने अपनी समस्याएं रखते हुए आरोप लगाया कि उनके गांवों का नाम सरकारी रिकॉर्ड से हटाया जा रहा है और प्रदूषण व कंपनी की मनमानी से हालात बिगड़ते जा रहे हैं.

दौरे के अंतिम चरण में शिबूटांड़ गांव पहुंचकर चम्पाई सोरेन ने दिवंगत आंदोलनकारी प्रेम प्रसाद महतो को श्रद्धांजलि दी. यहां उन्होंने हल-बैल चलाकर प्रतीकात्मक रूप से अपने इरादे जाहिर किए.

उन्होंने कहा कि यदि तय समय सीमा में समाधान नहीं हुआ, तो राज्यभर के विस्थापित बोकारो में एकत्रित होकर खाली पड़ी जमीन पर हल चलाएंगे और बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे.
चम्पाई सोरेन का यह दौरा संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में झारखंड में विस्थापितों के मुद्दे पर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन देखने को मिल सकता है.
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