BOKARO : बीएसएल प्लांट से उत्सर्जित होने वाले प्रदूषण पर The Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) ने एक रिपोर्ट पेश की है. रिपोर्ट के अनुसार बीएसएल प्लांट से उत्सर्जित होने वाले प्रदूषण के कारण बड़ी संख्या में लोगों में स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या सामने आ रही है. बीएसएल के आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं, खास कर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए यह गंभीर समस्या बनता जा रहा है.
इस रिपोर्ट ने बीएसएल प्लांट से निकलने वाले प्रदूषण को, हर साल पैदा होने वाले 270 कम वजन वाले बच्चे और 280 समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के मामले से जोड़ा है. साथ ही अस्थमा के बढ़ते मामलों का कारक होने का भी अनुमान लगाया है.
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स्वास्थ्य संबंधी नुकसान
CREA द्वारा वित्तीय वर्ष 2023 के लिए बनाए गए रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि प्लांट से निकलने वाला सूक्ष्म कण(PM2.5) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे खतरनाक प्रदूषकों के कारण 170 लोगों लोगों की मौत हुई है. इसके अलावा हर साल लगभग 290 लोग गंभीर अस्थमा जैसी बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं.
आर्थिक नुकसान
रिपोर्ट में प्रदूषण के कारण हो रहे हैं आर्थिक नुकसान पर आकलन करते हुए बताया गया है कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण लगभग 1.23 लाख कार्य दिवसों का नुकसान होता है. इससे उत्पादकता प्रभावित होती है और कई क्षेत्रों में आर्थिक असर पड़ता है. वित्तीय वर्ष 2023 में लगभग 79 मिलियन अमेरिकन डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया गया है.
अभी भी फॉसिल फ्यूल का उपयोग
रिपोर्ट यह बताती है कि बोकारो स्टील प्लांट यानी बीएसएल देश के पुराने स्टील प्लांट में से एक है यहां अभी भी कोयला जैसी प्रदूषण फैलाने वाली ईंधन का उपयोग होता है इसके अलावा चिमनियों में पर्याप्त वायु प्रदूषण नियंत्रण वाली प्रणाली भी नहीं है.
रिपोर्ट के मुताबिक बीएसएल प्लांट के सिंटर स्टैक के 6 डक्ट में से केवल दो में ही आधुनिक इलेक्ट्रोस्टेटिक प्रेसिपिटेटर (ESP) लगे हुए हैं जबकि बाकी में पुराने साइक्लोन टेस्ट कलेक्टर लगे हुए हैं. इस पर विशेषज्ञ का कहना है कि यह व्यवस्था प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए काफी नहीं है.
क्या कहते हैं CREA के सदस्य
CREA के एनालिस्ट लौरी माइलिवर्टा का कहना है कि भारत स्टील उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है लेकिन अभी भी प्रभावी उत्सर्जन नियंत्रण और स्वच्छ तकनीकों का उपयोग करने में पीछे है. वहीं CREA की विश्लेषक अनुभा अग्रवाल ने बताया कि बीएसएल प्लांट से उत्सर्जित प्रदूषण का मामला स्टील प्लांट से जुड़े पर्यावरणीय और स्वास्थ्य जोखिमों का चिंताजनक उदाहरण है इस क्षेत्र में स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेही कम दिखाई देती है.
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बोकारो विधायक ने मामला उठाया विधानसभा में
वहीं इस मामले को बोकारो विधायक श्वेता सिंह ने गुरुवार को झारखंड विधानसभा के चालू सत्र में उठाया. उन्होंने बीएसएल प्लांट से उत्सर्जित प्रदूषण पर CREA की रिपोर्ट को बेहद चिंताजनक बताया है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति आसपास के क्षेत्र के लोगों विशेष कर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. उन्होंने सरकार से बोकारो स्टील प्लांट में अत्याधुनिक प्रदूषण नियंत्रण तकनीक लागू करने की मांग की. साथ ही Continuous Emission Monitoring System (CEMS) को सुनिश्चित करने का आग्रह किया. जिससे आसपास के क्षेत्र में वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा सके ताकि आम जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.
