Ranchi: झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा समेत TDPL द्वारा संचालित कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को इसकी जानकारी मीडिया को दी. उन्होंने कहा कि TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं और उससे जुड़ी सभी गतिविधियों को रद्द किया जाएगा.इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रोजेक्ट भवन में कैबिनेट के अन्य मंत्रियों के साथ करीब तीन घंटे तक बैठक की. बैठक में परीक्षाओं को रद्द करने के तकनीकी पहलुओं के साथ-साथ राज्य की परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी चर्चा हुई.
छात्रों से नहीं हो सकी वार्ता
सरकार ने सोमवार को छात्र प्रतिनिधियों के साथ उनकी मांगों पर चर्चा के लिए स्टेट गेस्ट हाउस में दोपहर 2 बजे बैठक बुलाई थी. हालांकि, छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के मंत्रियों के बीच वार्ता नहीं हो सकी.
छात्रों से बातचीत से पहले मुख्यमंत्री ने कैबिनेट के सहयोगियों के साथ बैठक कर पूरे मामले पर विचार-विमर्श किया. अब सरकार अपने फैसले से छात्र प्रतिनिधियों को अवगत कराएगी.
परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए बनेगी कमेटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का फैसला लिया गया है. इसके साथ ही सरकार ने एक पोर्टल के माध्यम से छात्रों और अभिभावकों से सुझाव लेने की बात भी कही है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छात्रों, अभिभावकों और अन्य संबंधित पक्षों के सुझावों पर भी विचार किया जाएगा.मुख्यमंत्री ने कहा कि 14वीं JPSC PT से जुड़ा मामला पहले ही सुलझाया जा चुका है. बैकलॉग नियुक्तियों के मामले में भी प्रक्रिया को लेकर समाधान निकाला गया है. उन्होंने कहा कि कई नियुक्तियां हुई हैं, हालांकि कुछ मामलों पर अंतिम सहमति नहीं बन सकी थी.
इन्हीं मामलों का पटाक्षेप करने के लिए कैबिनेट की विशेष बैठक बुलाई गई थी.
TDPL की गतिविधियां रद्द
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि TDPL द्वारा ली गई परीक्षाओं और उससे जुड़ी गतिविधियों को रद्द किया जाएगा. सरकार के इस फैसले के बाद JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के बीच आगे की प्रक्रिया को लेकर अब सरकार की अगली घोषणा का इंतजार है.
सरकार के फैसले से अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब और किस नई व्यवस्था के तहत कराया जाएगा. साथ ही, नई परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी.
