RANCHI : रांची में कुछ हो ना हो, लेकिन जमीन का खेल जरूर होते रहता है. आदिवासी और मूलवासी की शुभचिंतक कही जाने वाली पुलिस और प्रशासन की ही मदद से जमीन की लूट बदस्तूर जारी है. इंतहा तो यह है कि जिनकी जमीन है, उन्हें ही बेल के लिए कोर्ट का चक्कर लगाना पड़ रहा है. किसी-किसी मामले में जिन रैयतों ने क्लेम किया यह जमीन उनकी है, उन्हें जेल तक की हवा खानी पड़ी. मतलब कहा जाए तो बंगाल में बैठा जमीन माफिया रांची के आदिवासी और मूलवासी जमीन का मालिक हो जा रहा है. और यह सारा खेल यूं ही नहीं हो रहा है, इस खेल में पावर, पैसा और ठसक तीनों का कॉकटेल साफ तौर से देखा जा रहा है. माफिया रैयतों को फोन कर जमीन पर जाने तक से मना कर रहा हैं. फोन पर गाली-गलौच कर रहा है. नतीजा भुगतने की बात कर डरा रहा है. काफी कम समय में इन माफिया महाशय ने काफी नाम बनाया है और साथ में पैसा भी. इस माफिया को लोगों की तरफ से एक छद्म नाम दिया गया है, और वो नाम है ‘डीबी एंड कंपनी’. हालांकि एक दूसरे नाम की कंपनी की कागजों पर यह माफिया सारा खेल कर रहा है.
इसे भी पढ़ें : झारखंड में DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल, केंद्र ने जताई आपत्ति
डीबी एंड कंपनी के जमीन कब्जा करने का ऑनगोइंग प्रोजेक्ट
फिलहाल इन डीबी एंड कंपनी जमीन माफिया महाशय के रांची आस-पास दो मेगा प्रोजेक्ट चल रहे हैं. एक 23 एकड़ का है और दूसरा करीब 20 एकड़ का. गौर करने वाली बात यह है कि एक प्रोजेक्ट ओरमांझी में चल रहा है, तो दूसरा कांके अंचल में. इन दोनों प्रोजेक्ट को चलाने के लिए डीबी एंड कंपनी साम-दाम-दंड-भेद जैसे सभी हथकंडों का इस्तेमाल कर रही है. 23 एकड़ वाले केस में तो डीबी एंड कंपनी ने तो उस रैयत को, जो उस जमीन पर अपना क्लेम कर रहा है उसे ही जमीन पर जाने से मना करता है. गाली-गलौच के अलावा कई तरह की धमकी देता है. इनकी जुर्रत देखिए. फोन कर एक रैयत को सीधा कहता है कि जमीन पर काम किसी हाल में नहीं रुकना चाहिए. अगर विरोध किया तो पुलिस से उठवा लेंगे. दूसरा वाला प्रोजेक्ट जो 20 एकड़ का है, उसमें तो डीबी एंड कंपनी ने हद ही कर दी. जिसने कहा कि यह जमीन हमारा है. सारे कागजात मेरे पास हैं, उसे ही डीबी एंड कंपनी ने जेल शिफ्ट करा दिया. अब उनके सभी घरवाले बेल के लिए कोर्ट का चक्कर काट रहे हैं.
इसे भी पढ़ें : पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति ने वाहन चालक के साथ की मारपीट
सत्ता शीर्ष का वहरदस्थ हासिल है इसे
सोचने वाली बात है कि भला बंगाल का रहने वाला एक शख्स कैसे क्लेम कर सकता है कि ओरमांझी में एसटी लैंड उसका है. भला कांके में एक मूलवासी की जमीन को डीबी एंड कंपनी कैसे कह सकता है कि वो उसका है. जाहिर सी बात है कि इन्हें सत्तीशीर्ष का भी संरक्षण मिला हुआ है. साथ ही पुलिस की एक विंग का पूरा सहयोग डीबी एंड कंपनी को मिला हुआ है. जिस विभाग में आम आदमी की शिकायत पर कर्मियों और अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती, वही विभाग डीबी एंड कंपनी के कहने पर ऐसे एक्शन में आता है, जैसे गृह विभाग की तरफ से अधिसूचना जारी की गयी हो. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे डीबी एंड कंपनी इतना पावरफुल हो गया है. किसका हाथ है इसके सिर पर है? आने वाले दिनों में Loktantra 19 पूरे खेल का खुलासा करेगा.
