Ranchi : झारखंड के बोकारो जीला के छात्र आदित्य मिश्रा की सफलता की कहानी एक बार फिर परीक्षा मूल्यांकन प्रणाली और रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया को चर्चा के केंद्र में ले आई है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं विज्ञान संकाय की परीक्षा में पहले 99.20 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले आदित्य ने अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था. इसके बाद उनके अंक बढ़ गए और वे संयुक्त रूप से टॉपर बन गए.

बायोलॉजी में बढ़े अंक, बढ़ गया कुल प्रतिशत
रीवैल्यूएशन के बाद जीवविज्ञान विषय में आदित्य के अंक 96 से बढ़कर 99 हो गए. इसके साथ ही उनका कुल प्रतिशत 99.20 से बढ़कर 99.60 हो गया. अंकों में हुए इस बदलाव ने उन्हें देश के संयुक्त टॉपर्स की सूची में पहुंचा दिया.
डॉक्टर बनने का सपना
आदित्य मिश्रा का सपना डॉक्टर बनने का है. वे चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं और इसके लिए आगे की तैयारी में जुटे हैं. उनकी उपलब्धि न केवल उनके परिवार और स्कूल के लिए गर्व का विषय है, बल्कि अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है.
लेकिन कहानी केवल तीन अंकों की नहीं
हालांकि इस सफलता के साथ कुछ महत्वपूर्ण सवाल भी सामने आए हैं. चर्चा केवल तीन अंकों के बढ़ने की नहीं है. बड़ा सवाल यह है कि यदि रीवैल्यूएशन के बाद कोई छात्र संयुक्त टॉपर बन सकता है, तो क्या ऐसे अन्य छात्र भी हो सकते हैं जिनके अंक वास्तविक मूल्यांकन से कम दर्ज हुए हों ?
क्यों महत्वपूर्ण होता है हर एक अंक ?
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं में प्रत्येक अंक का विशेष महत्व होता है. कई बार एक या दो अंक किसी छात्र को मेरिट सूची में जगह दिला देते हैं. कई मामलों में यही अंक प्रतिष्ठित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश का आधार बनते हैं. वहीं कुछ छात्रों के लिए यही अंक एक अतिरिक्त वर्ष की मेहनत और प्रतीक्षा से भी बचा सकते हैं.
रीवैल्यूएशन प्रक्रिया पर फिर शुरू हुई बहस
आदित्य मिश्रा का मामला एक बार फिर मूल्यांकन प्रणाली की सटीकता को लेकर बहस छेड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि रीवैल्यूएशन छात्रों को पारदर्शिता और निष्पक्षता का अवसर देता है, लेकिन जब पुनर्मूल्यांकन के बाद अंकों में उल्लेखनीय बदलाव सामने आता है, तो मूल मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं.
क्या मूल्यांकन प्रणाली को और बेहतर बनाने की जरूरत है ?
शिक्षा जगत के कई जानकार मानते हैं कि मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक सटीक तथा त्रुटिरहित बनाने की आवश्यकता है. उनका कहना है कि छात्रों का भविष्य अंकों से जुड़ा होता है, इसलिए मूल्यांकन में छोटी सी चूक भी बड़े प्रभाव छोड़ सकती है.
हर अंक तय कर सकता है भविष्य की दिशा
आदित्य मिश्रा की उपलब्धि निस्संदेह प्रेरणादायक है, लेकिन उनकी कहानी यह भी याद दिलाती है कि शिक्षा व्यवस्था में हर अंक की अहमियत कितनी अधिक है. कभी यही अंक किसी छात्र को टॉपर बनाते हैं, कभी प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश दिलाते हैं और कभी उसके जीवन का एक महत्वपूर्ण वर्ष बचा लेते हैं.
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