GODDA : कोई गांव आज भी शैक्षणिक रूप से पिछड़ा हुआ है इसे ऐसे समझ सकते हैं, गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड के अंतर्गत पहाड़ों के ऊपर बसे एक सुदुर्वर्ती गांव में आज तक कोई भी व्यक्ति 10वीं तक नहीं पढ़ा है. शिक्षा की जिसे बेसिक नर्सरी कहा जाता है ‘आंगनबाड़ी’ उसमे न तो सेविका और न ही सहायिका की नियुक्ति हो पाई है.
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गोड्डा जिले के बोआरीजोर प्रखंड अंतर्गत बड़ा कोठा से ऊपर पहाड़ पर बसे आदिम जनजाति समुदाय के बीच गोड्डा उपायुक्त अंजलि यादव पहुंची थी. कड़ी धूप और दुर्गम रास्तों के बीच उपायुक्त ने करीब 5 किलोमीटर पैदल चलकर पहाड़ पर बसे लोगों से मुलाकात की. इस दौरान गुजरते ठंड में कंबल वितरण भी किया गया. कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार सहित स्वास्थ्य कल्याण विभाग, पीएचईडी जल आपूर्ति विभाग, खाद्य आपूर्ति विभाग समेत कई विभागों के पदाधिकारी मौजूद रहे. प्रशासन की ओर से विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई और समस्याओं को सुना गया.
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हालांकि क्षेत्र की वास्तविक स्थिति चिंताजनक दिखी. स्थानीय लोगों ने बताया कि गांव में अब तक कोई भी व्यक्ति 10वीं कक्षा तक शिक्षित नहीं है. मूलभूत व्यवस्थाओं का आलम यह है कि आज तक वहां न तो आंगनबाड़ी सेविका, न सहायिका और न ही सहिया की नियुक्ति हो पाई है. जब इस विषय पर स्थानीय लोगों ने उपायुक्त अंजलि यादव से सवाल पूछने की कोशिश की, तो वह स्पष्ट जवाब देने से बचती नजर आईं. इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर मूलभूत सुविधाओं की कमी के लिए जिम्मेदार कौन है? और समाधान कब तक होगा?
