PAKUR : पाकुड़ प्रखंड कार्यालय में रोजगार सेवकों को पंचायत आवंटन के नाम पर खेल चल रहा है. यह खेल पंचायत आवंटन की बार-बार निकाली जा रही चिट्ठियों का है. जिसमें रोजगार सेवकों को पहले तो कोई पंचायत चिन्हित कर आवंटित किया जाता है, लेकिन बारहवें दिन में फिर से एक और चिट्ठी निकाल कर उस पंचायत से हटाकर दूसरा पंचायत आवंटित कर दिया जाता है. उदाहरण के तौर पर जिस रोजगार सेवक को कोई पंचायत दे दिया गया और बारह दिन बाद अगले ही आदेश में उसी रोजगार सेवक को उस पंचायत से हटाकर दूसरा पंचायत दे दिया जाता है. आखिर इसके पीछे वजह क्या है? इस पर सवाल खड़े होना लाजिमी है. लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं और सवाल भी उठाए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि क्या वह रोजगार सेवक पहले आवंटित पंचायत का काम संभाल नहीं पा रहे थे? अगर ऐसा है तो फिर अभी जो पंचायत दिया गया है, वहां का काम कैसे संभालेंगे? आखिर कोई भी पंचायत दे दीजिए, काम तो वही रहेगा. यह भी चर्चा है कि पंचायत आवंटन में अपने पसंद के रोजगार सेवक पर संबंधित अधिकारी ज्यादा मेहरबान है, शायद इसलिए बारह दिन के अंदर ही पंचायत आवंटन की दो-दो चिट्ठियां निकालना पड़ रहा है. यह मामला प्रखंड कार्यालय में चर्चा का विषय बना हुआ है. प्रखंड कार्यालय ही नहीं, बल्कि पंचायतों में भी चर्चाएं तेज हो गई है.
इसे भी पढ़ें : गोचर जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र भवन निर्माण का विरोध, बंद कराया काम
कब-कब निकाली गई चिट्ठी
एक चिट्ठी 05 फरवरी को निकाली जाती है और दूसरी चिट्ठी 17 फरवरी को दोबारा निकल जाता है. 05 फरवरी को निकाली गई चिट्ठी में प्रखंड कार्यालय में ही पदस्थापित रोजगार सेवक मैमुर अली को संग्रामपुर पंचायत आवंटित किया जाता है. इसके बाद 17 फरवरी को ही चिट्ठी में मैमुर अली को फरसा पंचायत मिलता है. पहली चिट्ठी में अब्दुल गनी को संग्रामपुर से फरसा पंचायत किया जाता है. दूसरी ही चिट्ठी में अब्दुल गनी को फिर से संग्रामपुर पंचायत आवंटित किया जाता है. इसी तरह सफीक अहमद को पहली चिट्ठी में झिकरहटी पुर्वी पंचायत से हटाकर नरोत्तमपुर और तारानगर किया जाता है. दूसरी चिट्ठी में सफीक अहमद को तारानगर पंचायत तो दिया जाता है, लेकिन नरोत्तमपुर पंचायत से हटाकर चेंगाडांगा कर दिया जाता है. वहीं सुकांत कुमार को पहली चिट्ठी में रहसपुर से हटाकर चेंगाडांगा आवंटित किया जाता है और बारह दिन बाद दूसरी ही चिट्ठी में फिर से रहसपुर पंचायत आवंटित कर दिया जाता है. रोजगार सेवक सैदुर रहमान को सीतापहाड़ी और चेंगाडांगा आवंटित था. पहली चिट्ठी में सीतापहाड़ी और रहसपुर कर दिया गया. पर दूसरी चिट्ठी में सिर्फ सीतापहाड़ी ही रह गया. उमेश प्रसाद साह को पहले चिट्ठी में मदन मोहनपुर और मालपहाड़ी पंचायत आवंटित किया गया. दूसरी चिट्ठी में मदन मोहनपुर से हटा दिया गया और मालपहाड़ी के साथ मनिकापाड़ा आवंटित किया गया. वहीं राकेश कुमार भगत को पहली चिट्ठी में पृथ्वीनगर से हटाकर मनिकापाड़ा कर दिया गया. जबकि दूसरी ही चिट्ठी में मनिकापाड़ा से हटा दिया गया और उन्हें सिर्फ पृथ्वीनगर ही आवंटित किया गया. इसी तरह रिजाउल करीम को पहली चिट्ठी में मनिकापाड़ा से हटाकर पृथ्वीनगर कर दिया गया और दूसरी ही चिट्ठी में फिर से पृथ्वी नगर से हटाकर मदनमोहनपुर कर दिया गया. इस तरह और भी कई रोजगार सेवक को पंचायत आवंटित किए गए हैं. इधर बीपीओ अजित कुमार टुडू ने कहा कि रोजगार सेवकों को नियम अनुसार ही पंचायत आवंटित किया गया है. हालांकि उन्होंने लघु सिंचाई कार्यों का भी हवाला दिया है.
इसे भी पढ़ें : नाम और काम से हैं नौकरशाह, लेकिन रांची के सबसे पॉश इलाके में बन रहा इनका शीशमहल, देखकर रह जाएंगे दंग
