Akshay Kumar Jha
DHANBAD : भारत की कोल राजधानी कहे जाने वाला धनबाद. झारखंड की शान माना जाने वाला धनबाद. कोयला से अकूत दौलत कमाने वाले रइसों का धनबाद. सच मानिए तो यह सभी बातें सिर्फ बोलने और दिखाने के लिए हैं. दरअसल, यह है ‘बेशर्म धनबाद’. 28 जनवरी को एक बीसीसीएल कर्मी अर्जुन कोड़ा की मौत संदिग्ध हालत में हो जाती है. मामला पीबी एरिया का है. प्रबंधन का कहना है कि अर्जुन ने फांसी लगा ली. लेकिन, घरवालों का कहना है कि अर्जुन ऐसा कभी कर ही नहीं सकते. खैर, ये बात तो आरोप-प्रत्यारोप व जांच की है. दरअसल इंसानियत को शर्मसार करने वाली बात यह है कि अर्जुन का शव आठ दिनों से पुटकी जीएम ऑफिस के सामने पड़ा है लेकिन सुध लेने वाला कोई नहीं है. उनके घरवाले अपने अर्जुन का शव लेकर पुटकी जीएम ऑफिस के गेट पर धरने पर बैठे हैं. इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है.

बेशर्म धनबाद और बीसीसीएल की असली कहानी
धनबाद के पुटकी कोलियरी में कार्यरत बीसीसीएल कर्मी अर्जुन कोड़ा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाती है. घटना के आंठवे दिन भी परिजन शव के साथ पीबी एरिया कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं. वो मृतक के आश्रित को तत्काल नियोजन, मामले की उच्चस्तरीय जांच और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं. यही करना उनको भारी पड़ गया. बेसुध प्रबंधन पोस्टमार्टम रिपोर्ट की बात कह पूरे मामले से पलड़ा झाड़ दे रहा है. इक्का-दुक्का नेता वहां पहुंचे और कैमरे के सामने चेहरा चमकाने के बाद वो अपनी राजनैतिक रोटी सेंक कर वापस घर को चल दिए. सांसद ढुल्लु महतो मेयर चुनाव में अपनी पत्नी की कैंपेनिंग में व्यस्त हैं. कांग्रेस की सासंद प्रत्याशी रहीं अनुपमा सिंह (पति जयमंगल सिंह) ने थोड़ी औपचारिकता निभायी, लेकिन मामला किसी फैसले तक नहीं पहुंच सका. बाकी सभी जनप्रतिनिधि गहरे नींद में सो रहे हैं. रोजाना हजारों लोग उस रास्ते से गुजर रहे हैं, लेकिन फर्क किसी को नहीं पड़ा रहा है. इस बेहद संवेदनशील मामले को कैसे बेशर्म हो चुकी धनबाद डील कर रहा है, यह इंसानियत का गिरता हुआ ग्राफ का इंडेक्स माना जा सकता है. यदि यही वाकया किसी वीआईपी के घर के परिजन के साथ हुआ होता, तो नजारा कुछ और ही होता.
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