RANCHI : 30 जनवरी वह तिथि है जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस दिन को देशभर में शहीदी दिवस के रूप में मनाया जाता है. 30 जनवरी 1948 का दिन भारत के इतिहास का सबसे दुखद दिन माना जाता है, जब बापू हमेशा के लिए मौन हो गए. यह दिन न केवल उन्हें श्रद्धांजलि देने का अवसर है, बल्कि उनके विचारों, आदर्शों और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का भी दिन है.महात्मा गांधी ने पूरे जीवन अहिंसा और सत्य के मार्ग का पालन किया. उन्होंने कभी हिंसा या उग्र आंदोलन का सहारा नहीं लिया. बापू संयम और आत्मनियंत्रण में विश्वास रखते थे. इसी कारण वे हर सोमवार को मौन व्रत रखते थे. उनकी आत्मकथा My Experiments with Truth में इसका उल्लेख मिलता है. गांधी जी का मानना था कि अधिक बोलने से संवाद कमजोर हो जाता है और कई समस्याओं का समाधान मौन से भी निकल सकता है. मौन व्रत के दौरान वे आवश्यक होने पर लिखकर संवाद करते थे. ब्रिटेन के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटेन ने भी कहा था कि वे गांधी जी से सोमवार के दिन मिलना पसंद करते थे क्योंकि उस दिन बापू मौन में रहते थे.
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महात्मा गांधी की स्मृतियां केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत से भी गहराई से जुड़ी हैं. वर्ष 1937 में गांधी जी ने कोलकाता में सरायकेला राजघराने के रॉयल डांस ग्रुप द्वारा प्रस्तुत विश्व प्रसिद्ध छऊ नृत्य देखा था. यह कार्यक्रम शरत चंद्र बोस के निवास पर आयोजित किया गया था. इस नृत्य प्रस्तुति में कुंअर विजय प्रताप सिंहदेव, राजकुमार सुधेंद्र नारायण सिंहदेव और नाटशेखर बन बिहारी पट्टनायक अपनी टीम के साथ शामिल थे.छऊ नृत्य में प्रस्तुत राधा-कृष्ण नृत्य ने गांधी जी को गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने कहा था कि नृत्य देखते समय ऐसा लग रहा था जैसे वे वृंदावन में खड़े हों और उनके सामने राधा-कृष्ण सजीव रूप में नृत्य कर रहे हों.
गांधी जी ने इस कला को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा का अनमोल प्रतीक बताया. उन्होंने सरायकेला छऊ नृत्य की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी कलाएं भारत की आत्मा को जीवित रखती हैं.आज भी सरायकेला का छऊ नृत्य भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. महात्मा गांधी का यह अनुभव यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति को केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि कला और परंपराओं के माध्यम से भी समझा जा सकता है. 30 जनवरी का दिन हमें बापू के विचारों के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की भी प्रेरणा देता है.
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