KHUNTI : झारखंड में सबसे घिनौनी प्रथा है डायन-बिसाही का शक. इस शक से वशीभूत होकर व्यक्ति किसी की जान तक लेने पर उतारू हो जाता है. दुर्भाग्य से झारखंड में डायन-बिसाही जैसे अंधविश्वास से आदिवासी समुदाय ग्रसित है. इसका सबसे बड़ा कारण अशिक्षा और संसाधनों की कमी है. कई बार आर्थिक रूप से कमजोर परिवार का कोई सदस्य यदि गंभीर रूप से बीमार हो जाए और इलाज कराने में असमर्थ हो जाए तो फिर उसका परिवार ओझा-गुणी का सहारा लेता है. इसी दौरान यदि मरीज की मौत हो जाए तो उसी ओझा-गुणी के चक्कर में किसी को इस मौत का जिम्मेदार ठहरा कर डायन बता दिया जाता है.
इसे भी पढ़ें : आदिवासी कवि महादेव टोप्पो को मिलेगा कालिदास अवार्ड
राज्य के खूंटी से अक्सर डायन-बिसाही के मामले सामने आते रहते हैं. ताजा मामला जिले के मारंगहादा थाना क्षेत्र से है. जहां जादू-टोना के शक में 7 साल के बच्चे की निर्ममता से जान ले ली गई. घटना 23 जनवरी 2026 की है. 55 वर्षीय रघु मुंडा और 25 वर्षीय जगरनाथ मुंडा ने लक्ष्मण मुंडा के 7 वर्षीय बेटे की कुदाल से निर्ममता से हत्या कर दी.
पूरा मामला
पुलिस के अनुसार लांदुप पंचायत के बीमडीह गांव निवासी रघु मुंडा के बेटे की कुछ दिन पहले गंभीर बीमारी से मौत हुई थी, रघु मुंडा को शक था कि लक्ष्मण मुंडा द्वारा किए गए जादू-टोना से ही उसके बेटे की मौत हुई है. इस अंधविश्वास से उपजे प्रतिशोध की भावना में उसने नृशंस हत्याकांड को अंजाम दिया. रघु मुंडा ने जगरनाथ मुंडा के साथ मिलकर योजना के तहत लक्ष्मण मुंडा के बेटे को चॉकलेट देने के बहाने बुलाया और कुदाल से उसकी निर्ममता से हत्या कर दी.
लक्ष्मण मुंडा ने इस घटना को लेकर मारंगहादा थाने में मामला दर्ज कराया था. थाना प्रभारी विकास कुमार जायसवाल ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की. पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कुबूल कर लिया. मारंगहादा थाना प्रभारी विकास कुमार जायसवाल ने बताया कि इस मामले में 23 जनवरी को बीएनएस धाराओं और डायन प्रथा प्रतिषेध की धारा में मामला दर्ज किया गया था. हत्यारोपियों की शिनाख्त पर प्रयुक्त कुदाल बरामद किया गया. घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी और मृतक का एक जोड़ी चप्पल को जब्त किया गया. इस मामले के खुलासे में हुंट मुखिया सोमा मुंडा और बंदाडीह ग्राम के लोगों का भी सहयोग मिला.
इसे भी पढ़ें : झारखंड में फिर बदलेगा मौसम का 26 जनवरी को सुबह कोहरा और दिन में साफ मौसम
