RANCHI : झारखंड सरकार की नई शराब नीति इन दिनों पूरे राज्य में बहस का विषय बना हुआ है. इस नीति के लागू होने के बाद से ही शराब बेचने वाले दुकानदारों की मुश्किलें बढ़ गयी है .राज्य के कई इलाकों से यह शिकायत सामने आ रही है कि शराब की बिक्री पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है, वजह यह है की उत्पाद विभाग की शर्ते शराब दुकानदारो के लिए नागवार साबित हो रहा है .दुकानदारो का कहना है कि मौजूदा हालात में राज्य की करीब 39 प्रतिशत शराब दुकानें नुकसान में चल रही हैं और धीरे-धीरे बंद होने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं. इस हालात ने दुकानदारों के साथ-साथ सरकार के राजस्व को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर दुकानें बंद होती हैं तो सरकार की आमदनी भी कम हो जाएगी.

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नई शराब नीति के तहत सरकार ने शराब दुकानों को सरकारी नियंत्रण से हटाकर निजी हाथों में सौंप दिया है. इसके साथ ही लाइसेंस फीस, टैक्स और हर दुकान से मिलने वाले तय राजस्व में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी गई है. दुकानदारों का कहना है कि सरकार ने यह मान लिया कि हर जगह शराब की बिक्री बराबर होती है, जबकि हकीकत इससे बिल्कुल अलग है. कई इलाकों में ग्राहक बहुत कम हैं, फिर भी वहां उतना ही टैक्स और उतना ही लक्ष्य तय कर दिया गया है. ऐसे में दुकानदारों के लिए मुनाफा कमाना तो दूर, दुकान का किराया, स्टाफ की तनख्वाह और रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है. कई लोग कर्ज लेकर दुकान चला रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक हालत और बिगड़ती जा रही है.
कारोबारियों का कहना है कि नीति बनाते समय जमीनी हालात को बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया गया.
हर दुकान की बिक्री क्षमता अलग होती है, लेकिन नई नीति में इस फर्क को नहीं समझा गया. जिन दुकानों की बिक्री कम है, वहां तय लक्ष्य पूरा करना लगभग नामुमकिन हो गया है. लक्ष्य पूरा न होने पर दुकानदारों को हर महीने जुर्माना भरना पड़ता है और विभागीय दबाव भी झेलना पड़ता है. कई दुकानदारों का कहना है कि वे लगातार घाटा सहते-सहते अब थक चुके हैं और मजबूरी में दुकान सरेंडर करने का मन बना रहे हैं. अगर यही हालात रहे तो आने वाले समय में राज्य में शराब दुकानों की संख्या तेजी से घट सकती है.
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शराब कारोबार से जुड़े लोग और उनके संगठन अब झारखंड सरकार से खुलकर मांग कर रहे हैं कि नई शराब नीति की तुरंत समीक्षा की जाए. उनका कहना है कि टैक्स और लाइसेंस फीस में राहत दी जाए और राजस्व लक्ष्य को वास्तविक बिक्री के हिसाब से तय किया जा. दुकानदारों का साफ कहना है कि अगर सरकार ने समय रहते सुधार नहीं किया, तो इसका नुकसान सिर्फ कारोबारियों को नहीं होगा, बल्कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा. साथ ही सरकार को मिलने वाला राजस्व भी बुरी तरह प्रभावित होगा. अब देखना यह है कि झारखंड सरकार इस गंभीर स्थिति को कितनी गंभीरता से लेती है और शराब नीति में बदलाव कर कारोबारियों और राज्य दोनों को राहत देती है या नहीं .
