Suraj
SAHIBGANJ : साहिबगंज जिले के बरहेट अंचल क्षेत्र में जमीन से एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है, जिसमें बरहेट थाना में पदस्थ पदाधिकारी, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मांगें गए रिपोर्ट और नोटिस को तवज्जो नहीं दे रहे हैं. मामला बरहेट अंचल क्षेत्र के सनमनी मौजा से जुड़े सोरेन परिवार की है, यह परिवार न्याय की आस में दर-दर भटकने को मजबूर है. सोरेन परिवार आदिवासी (संथाल) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, तथा इनकी रैयती जमीनें (भूमि) झारखंड के संथाल परगना प्रमंडल में लागू संथाल परगना टेनेंसी एक्ट 1949 के अंतर्गत आती है. सोरेन खानदान में आने वाले सभी परिवार निर्धन हैं जबकि विपक्षी मरांडी परिवार वाले नौकरी पेशे से जुड़े रहे हैं जिस कारण नौकरशाही में उनकी पकड़ मजबूत है.
पूरा मामला जमाबंदी संख्या 66 से जुड़ा है, जिसमें वर्तमान वारिसों का गांव के ही एक मरांडी परिवार से जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा है.
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खतियान में दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक सनमनी मौजा के जमाबंदी संख्या 66 और 131 के मूल रैयत जोजे किशुन सोरेन, केशोर सोरेन, पांडु सोरेन वो मोहन सोरेन पेशरान शीतल सोरेन हैं, जमाबंदी संख्या 66 का कूल रकवा 31 बीघा 01 कट्ठा 03 धुर है, जिस पर विवाद चल रहा है. जमाबंदी संख्या 66 के कई दाग संख्या में लगभग पांच पीढ़ियों से सोरेन खानदान के परिवारों का मिट्टी का घर है, जिस पर सोरेन परिवार सदियों से निवास करते आए हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से गांव के मानसिंह मरांडी के परिवार द्वारा जमाबंदी संख्या 66 के सभी खेसरा संख्या में मालिकाना अधिकार को लेकर दावा किया जा रहा है. एसपीटी एक्ट 1949 के अंतर्गत मानसिंह मरांडी द्वारा अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय और अपर उपायुक्त के न्यायालय के फैसले के आधार पर जमाबंदी संख्या 66 के कूल रकवा का रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में अपना नाम दर्ज करा लिया गया है, और अब उक्त जमाबंदी संख्या के सभी दाग संख्या में जबरन कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, यहां तक कि जिसमें लगभग पांच पीढ़ियों से सोरेन खानदान के लोग घर बनाकर निवास करते आए हैं उस पर भी कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें बरहेट पुलिस की सहायता विपक्षी द्वारा ली जा रही है.
पीड़ित कलदह सोरेन वो परिवार के अन्य सदस्यों का कहना है कि विपक्षी मानसिंह मरांडी नौकरी पेशा वाला है, गांव में आर्थिक और मानसिक रूप से मजबूत है, जिस कारण उनके द्वारा हमारी पूर्वजों की जमीन को पुलिस और अंचल की मदद से जबरन छीना जा रहा है. पीड़ितों का कहना है कि मामले में जिला उपायुक्त साहिबगंज को भी आवेदन देकर निष्पक्ष जांच का मांग की गई थी, जिसका रिसीविंग भी उनके पास है, लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई. सिविल कोर्ट जाने के लिए उनके परिवार के पास पैसे नहीं हैं, क्योंकि गरीब हैं. पीड़ितों ने आगे बताया कि विपक्षी मानसिंह मरांडी द्वारा उनके पिताजी ठाकुर मरांडी के पिता मानसिंह मरांडी का सोरेन परिवार में घर जमाई होने का दावा किया जाता है, जिस आधार पर अब पोता मानसिंह मरांडी द्वारा जमाबंदी संख्या 66 के मालिकाना अधिकार को लेकर दावा किया जाता है. जबकि सच्चाई यह है कि विपक्षी के दादा मानसिंह मरांडी का संथाली प्रथागत नियम के अनुसार उनकी शादी अवैध थी, वो सोरेन परिवार के घर जमाई नहीं थे.
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पीड़ितों के घर में जबरन विपक्षी कर रहा कब्जा
विपक्षी द्वारा दायर अनुमंडल पदाधिकारी के न्यायालय में वाद संख्या 33/2012-13 के फैसले में विपक्षी मानसिंह मरांडी को जमाबंदी संख्या 66 का मालिकाना अधिकार दिया गया था, जिसके बाद सोरेन परिवार के लोगों ने अपर उपायुक्त के कार्यालय में अपील दायर किया था, अपील वाद संख्या 19/2018-19 के सुनवाई में विपक्षी के पक्ष में फैसला सुनाया गया था. जिसके बाद से लेकर अब तक विपक्षी द्वारा लगातार सोरेन परिवार को जमीन पर कब्जा करने हेतु प्रताड़ित किया जा रहा है. जबकि जमीन के असली वारिस होने का दावा सोरेन परिवार के लोग करते हैं, क्योंकि जमीन के मूल रैयत सोरेन टाईटल के थे, साथ ही इस जमाबंदी संख्या के सभी दाग संख्या में उपलब्ध जमीनों में सोरेन परिवार के लोगों का सदियों से जोत आबाद और वसोवास रहा है. विपक्षी मानसिंह मरांडी द्वारा बरहेट थाना को आवेदन देकर पीड़ितों पर घर खाली करने का दवाब बनाया जा रहा है, इससे पहले जबरन खेती योग्य जमीनों पर विपक्षी द्वारा कब्जा कर लिया गया है.
विपक्षी द्वारा जबरन जोत आबाद वाली जमीनों में कब्जा करने के बाद, पीड़ित सोरेन परिवार ने अनुमंडल पदाधिकारी के फैसले, अंचल बरहेट के आदेश, वंशावली में हेर-फेर, पेसा अधिनियम के क्षेत्र में संथाली प्रथागत नियमों को चुनौती देने एवं संथाल परगना टेनेंसी एक्ट 1949 के उल्लंघन करने के संबंध में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग को पत्र लिखकर न्याय का गुहार लगाया है. आयोग ने शिकायत के आलोक में जिला उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक साहिबगंज को समन भेजते हुए जवाब मांगा है लेकिन इस बीच विपक्षी द्वारा बरहेट पुलिस की सहायता लेकर पीड़ित सोरेन परिवार के घरों में जबरन कब्जा करने के उद्देश्य से घेराबंदी करने का प्रयास किया जा रहा है.
पीड़ित सोरेन परिवार के सदस्य पूरी तरह से टूट चुके हैं क्योंकि उन्हें सिर्फ सरकारी सिस्टम के कागजी आदेश के कारण उनके अपने ही पैतृक आशियाना से भागने को मजबूर किया जा रहा है. शनिवार को विपक्षी द्वारा जबरन सोरेन परिवार के घरों के सामने घेराबंदी की जा रही थी, जिसका विरोध करने पर सोमवार को बरहेट थाना द्वारा सोरेन परिवार को थाना परिसर में उपस्थित होने का फरमान जारी किया गया है. इस बाबत सोरेन परिवार के लोगों ने जब बरहेट थाना को सूचित किया कि उनका मामला राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पास लंबित है तथा जिला उपायुक्त और जिला पुलिस अधीक्षक से जवाबदेही मांगी गई है, अभी मामला आयोग के पास लंबित है इसलिए सुनवाई होने तक विपक्षी द्वारा जबरन कब्जा करने के प्रयास को रोक लगाया जाए, इस पर बरहेट थाना में पदस्थ पदाधिकारियों का कहना था “ऐसे समन (नोटिस) आते रहते हैं, आयोग क्या करेगा.. जो भी रिपोर्ट भेजेंगे वो तो हमलोग ही भेजेंगे…” यानी कि बरहेट थाना आदिवासियों के हित में कार्य करने वाली राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था को तवज्जो नहीं देती है. जबकि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के पास सिविल कोर्ट के समान शक्ति प्राप्त है. आयोग सभी मामलों की बारीकी से जांच करने के बाद और रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रपति तक को सीधी अनुशंसा कर सकती है. लेकिन राज्य के साहिबगंज जिले के बरहेट थाना और यहां पदस्थ पदाधिकारी आयोग की शक्तियों की अनदेखा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. आश्चर्य तब अधिक होता है जब संवैधानिक शक्तियों के निहित सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इसी बरहेट विधानसभा से विधायक चुनकर आते हैं.
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पीड़ित परिवार के पास जमीन का खजाना रसीद, खतियान और कब्जा भी है
पीड़ित सोरेन परिवार के सदस्यों के पास प्रधानी खजाना रसीद, अंचल द्वारा काटे गए खजाना रसीद, रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में वर्तमान सोरेन परिवार के लोगों का नाम (जिसे अब काट दिया गया है) तथा गांव के पंचनामे कागजात सहित सभी ठोस दस्तावेज उपलब्ध है, जिसके बाद भी न्याय के लिए इन्हें दर-दर भटकना पड़ रहा है, क्योंकि ये गरीब और कमजोर हैं. इस परिवार को कानूनी समझ नहीं है जिसका फायदा विपक्षी ने पूर्व के अफसरों की मिलीभगत से लिया है, और असली वारिस को ही जबरन जमीन और घर से भागने को मजबूर कर रहा है.
