RANCHI : झारखंड में पलायन एक गंभीर समस्या है. पलायन के रूप में एक बहुत बड़ा झारखंड का युवा वर्ग बाहर राज्यों या विदेशों में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने को विवश है. अन्य राज्यों या विदेश में काम करते हुए अक्सर उनके साथ दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना घट जाती है. जिसका परिणाम मजदूर के पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है.
पलायन को विवश यह लोग अपने परिवार को एक बेहतर जीवन स्तर दिलाने के लिए बाहर राज्यों या विदेशों में प्रवासी मजदूर के रूप में काम करने के लिए जाते हैं. इन मजदूरों की कुल संख्या और उनके कल्याण हेतु उठाए गए कदमों की जानकारी को लेकर विधानसभा के चालू सत्र में सवाल उठाया गया है.
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कितने श्रमिक
डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने सदन में प्रवासी श्रमिकों की कुल संख्या जाननी चाही, उन्होंने जानना चाह कि राज्य में जब 16 लाख प्रवासी मजदूर हैं तो केवल 1 लाख 91 हजार मजदूर ही क्यों रजिस्टर्ड हैं? तो वहीं जो मजदूर दुर्घटना का शिकार होते हैं उनके मुआवजे की राशि को 50000 से बढ़ाकर 5 लाख किये जाने की मांग की. साथ ही उनके लिए एक अलग आयोग गठन करने की जरूरत पर बल दिया.
2,19,169 प्रवासी श्रमिक रजिस्टर्ड
इस पर श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने जवाब देते हुए बताया कि 16 फरवरी तक श्रमाधान पोर्टल पर 2,19,169 प्रवासी श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है. शेष मजदूरों के रजिस्ट्रेशन के उपाय किए जा रहे हैं. उन्होंने 50,000 रुपए मु169आवजे की राशि को बढ़ाए जाने पर अपनी सहमति देते हुए कहा कि इस बारे में मुख्यमंत्री से चर्चा की जाएगी.
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अलग से आयोग की जरूरत नहीं
साथ ही प्रवासी श्रमिकों के लिए अलग से एक आयोग गठन के बारे में श्रम मंत्री का कहना था कि फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है क्योंकि श्रम विभाग के नियंत्रण में ही राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष संचालित हो रहा है और इसके माध्यम से दूसरे राज्यों के साथ संपर्क स्थापित करके प्रवासी मजदूरों को हर जरूरी सुविधा मुहैया कराई जाती है.
