रांची/चतरा : चतरा नगर परिषद के अध्यक्ष अताऊर रहमान उर्फ बाबू भाई की निर्वाचन पात्रता से जुड़े मामले में 2 जुलाई को महत्वपूर्ण सुनवाई होगी. झारखंड सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने उन्हें नोटिस जारी कर रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. यह मामला चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ-पत्र में कथित रूप से गलत जानकारी देने के आरोपों से जुड़ा है.

नगर विकास एवं आवास विभाग के अपर सचिव-सह-जांच पदाधिकारी कार्यालय की ओर से जारी नोटिस के अनुसार, झारखंड नगरपालिका निर्वाचित प्रतिनिधि (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2020 के तहत अताऊर रहमान की अयोग्यता से संबंधित मामला जांच समिति के समक्ष विचाराधीन है. सुनवाई 2 जुलाई 2026 को अपराह्न 4:15 बजे रांची के धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन में होगी,
जहां संबंधित पक्षों को अपना पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. विभाग ने इस मामले के शिकायतकर्ता अमन यादव और चतरा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी को भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने का निर्देश दिया है.
क्या है पूरा मामला ?
यह विवाद चतरा निवासी राजेश कुमार द्वारा झारखंड हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका (सिविल) संख्या 3880, वर्ष 2026 से जुड़ा है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 के नगर निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करते समय अताऊर रहमान ने अपने शपथ-पत्र में सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई.
याचिकाकर्ता का दावा है कि बाबू भाई ने शपथ-पत्र में केवल दो बच्चों का उल्लेख किया, जबकि उनके दो से अधिक जीवित बच्चे हैं. आरोप है कि यह तथ्य जानबूझकर छिपाया गया, जिससे उनकी चुनाव लड़ने की पात्रता पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है.
चुनावी पात्रता पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
याचिका में झारखंड सरकार द्वारा अधिसूचित उन नियमों का हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार निर्धारित परिस्थितियों में दो से अधिक जीवित बच्चों वाले व्यक्ति की नगर निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता प्रभावित हो सकती है.
याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल शपथ-पत्र में गलत जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निर्वाचन की वैधता और उम्मीदवार की पात्रता से जुड़ा गंभीर कानूनी प्रश्न बन जाएगा. चुनावी शपथ-पत्र में दी गई प्रत्येक जानकारी उम्मीदवार की पात्रता तय करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है.
विभाग को पहले भी दी गई थी शिकायत
राजेश कुमार ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने 16 मार्च 2026 को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव के समक्ष इस संबंध में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के साथ शपथ-पत्र और अन्य दस्तावेज भी सौंपे गए थे तथा मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई थी.
याचिका के अनुसार, विभागीय स्तर पर लंबे समय तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया. इसके बाद संबंधित अधिकारियों को विधिक नोटिस भी भेजा गया, लेकिन जब कथित रूप से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तब उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया.
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में हुई. प्रारंभिक सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपों को गंभीर मानते हुए नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव से शपथ-पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा.
अदालत ने विभाग को छह सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था और मामले की अगली सुनवाई भी इसी अवधि के बाद निर्धारित की गई.
अब 2 जुलाई की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है ?
हाईकोर्ट की कार्यवाही के समानांतर विभागीय जांच भी जारी है. 2 जुलाई को होने वाली सुनवाई में अताऊर रहमान उर्फ बाबू भाई को अपना पक्ष रखने और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा. इसके बाद विभाग मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकता है.
हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि फिलहाल बाबू भाई को न तो किसी अदालत और न ही किसी विभाग ने अयोग्य घोषित किया है. उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निर्णय सक्षम प्राधिकारी तथा न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला ?
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला स्थानीय निकाय चुनावों में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है. यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो इसका प्रभाव केवल चतरा नगर परिषद अध्यक्ष तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा शपथ-पत्र में दी जाने वाली सूचनाओं की विश्वसनीयता और निर्वाचन पात्रता से जुड़े नियमों की व्याख्या पर भी पड़ सकता है. फिलहाल सभी की निगाहें 2 जुलाई को होने वाली विभागीय सुनवाई और उसके बाद सामने आने वाले निर्णय पर टिकी हैं.
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