RANCHI : झारखंड में DMFT फंड में अनियमितता को लेकर केंद्र सरकार के खान मंत्रालय ने सख्त एक्शन लिया है. केंद्र ने राज्य सरकार से DMFT फंड के फिजूलखर्ची पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. आरोप है कि ‘प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना’ (PMKKY) के दिशा निर्देशों के विपरीत ये खर्च किए गए हैं. अब इसे लेकर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा है.
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नेता प्रतिपक्ष का आरोप
उन्होंने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखे एक पोस्ट के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री और अधिकारियों से DMFT फंड के पाई-पाई का हिसाब मंगा है. उन्होंने इस मामले में संज्ञान लेने के लिए केंद्र सरकार को धन्यवाद देते हुए लिखा है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में गरीब जनता प्रदूषित हवा में सांस लेने को विवश है जबकि राज्य के अधिकारी, मुख्यमंत्री के संरक्षण में DMFT फंड का दुरूपयोग करके अपने बंगले चमका रहे हैं. डाक बंगला बना कर मौज कर रहे हैं. एक ओर जहां खनन प्रभावित क्षेत्र में प्रदूषित हवा के कारण गरीब जनता फेफड़ों की बीमारी झेलने को मजबूर है. वहीं राज्य के अधिकारी DMFT के फंड से जिम बनाकर फिटनेस मेंटेन कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार सभी डीसी को वेतन सहित अन्य सुविधाएं देती है. ऐसे में बंगले को सजाने-संवारने और जिम बनाने के लिए DMFT फंड का दुरूपयोग करना अपराध है.
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क्या है मामला
गौरतलब है कि झारखंड में DMFT फंड के दुरूपयोग को लेकर हाल ही में मामला सामने आया था. प्रारम्भिक जांच और मीडिया रिपोर्ट्स (प्रभात खबर) में खुलासा किया गया था कि DMFT फंड से रांची समेत कई जिलों के सरकारी बंगलों की मरम्मत और सजावट पर करोड़ों खर्च किया गया. फंड का इस्तेमाल सुदूरवर्ती ग्रामीण इलाजों में करने बजाय मैकलुस्कीगंज में करीब ₹85 लाख की लागत से एक डाक बंगला बनाया गया.
AG की रिपोर्ट
महालेखाकार (AG) ने अपने ऑडिट में स्पष्ट रूप से पाया है कि राज्य के कई जिलों में DMFT फंड से उपायुक्तों के बंगलों में जिम, स्विमिंग पूल और लग्जरी इंटीरियर का काम किया गया है. जो माइनिंग गाइडलाइंस के विपरीत है.
भाजपा ने आरोप लगाया है कि लगभग ₹1,500 से ₹2,000 तक का DMFT घोटाला हुआ है. दरअसल DMFT का फंड उन इलाकों के लिए है जहां खनन होता है. जो प्रदूषण और विस्थापन झेलते हैं. केंद्र सरकार की सख्ती के बाद राज्य सरकार ने भी इस फंड के उपयोग का ऑडिट कराने का आदेश दिया है.
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