Vaibhav Pandey
GODDA : महागामा के मेयर प्रबोध सोरेन का मोबाइल नंबर काफी समय से बंद है और क्षेत्र में किसी को भी उनके कहीं होने की कोई जानकारी नहीं है. बताते चलें कि महागामा नगर पालिका, जो कि गोड्डा जिला का एक अनुमंडल और प्रखंड भी है, वहां पहली बार नगर पालिका का चुनाव हुआ. प्रबोध सोरेन बीजेपी समर्थित उम्मीदवार थे, जिन्होंने पहली बार मेयर की सीट पर जीत हासिल की.
अहले सुबह महागामा से कई लोगों ने कॉल किया और Loktantra 19 को सूचना मिली कि महागामा के नए मेयर प्रबोध सोरेन से किसी की भी बातचीत नहीं हो पा रही है और किसी को नहीं पता कि वे कहां हैं.
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उड़ रही अफवाहें, लग रहे कई कयास

जब से प्रबोध सोरेन का फोन बंद आ रहा है और किसी से भी उनकी बात नहीं हो पा रही है, तब से पूरे क्षेत्र में तरह तरह की अफवाहें उड़ रही हैं.
पहली अफवाह यह है कि मेयर पद हासिल करने के बाद प्रबोध सोरेन BJP छोड़कर किसी अन्य पार्टी की सदस्यता ले सकते हैं. लोगों का कहना है कि अगर ऐसा होता है तो यह माना जाएगा कि प्रबोध सोरेन ने चुनाव जीतने के लिए बीजेपी कार्यकर्ताओं को एक टूलकिट की तरह इस्तेमाल किया.
दूसरी अफवाह यह है कि प्रबोध सोरेन ने आगामी नगर पालिका उपाध्यक्ष चुनाव से खुद को दूर रखने और राजनीतिक सुरक्षा के चलते खुद को किसी के भी संपर्क से अलग रखा है, ताकि उन पर किसी तरह का चुनावी दबाव न आए.

यह भी कहा जा रहा है कि उपाध्यक्ष के चुनाव में “हॉर्स ट्रेडिंग” की संभावना हो सकती है. शायद प्रबोध सोरेन इसका हिस्सा नहीं बनना चाहते हों और इसी कारण वे खुद को किसी की जानकारी से दूर रखे हुए हों.
गरमाने लगी है महागामा की राजनीति

महागामा के पहले नगर चुनाव में जीत दर्ज करने वाले मेयर प्रबोध सोरेन के अचानक संपर्क से बाहर होने की खबर जैसे ही बाजार में फैली, वैसे ही महागामा की राजनीति भी गरमा गई.
चुनाव के समय की तस्वीरों को देखें तो उनमें गोड्डा जिले के कई बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ महागामा के पूर्व बीजेपी विधायक ‘अशोक भगत’ और गोड्डा से वर्तमान बीजेपी सांसद ‘निशिकांत दुबे’ भी प्रबोध सोरेन को चुनाव जिताने के लिए सक्रिय रूप से साथ चलते नजर आए थे.
ऐसे में अगर यह खबर आती है कि प्रबोध सोरेन पार्टी बदल सकते हैं, तो लोग इन नेताओं को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं कि आखिर इतनी मेहनत के बाद भी वे क्यों, किस कारण से और किसके इशारे पर पार्टी बदलेंगे.
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क्या बोल रही है जनता

प्रबोध सोरेन के पार्टी बदलने और तमाम अफवाहों को लेकर हमने महागामा में कई लोगों से जानकारी लेने की कोशिश की.
सबसे पहले हमने प्रबोध सोरेन को ही कॉल किया, लेकिन उनका नंबर लगातार बंद आया. इसके बाद हमने महागामा के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी चंद्रशेखर कुमार से संपर्क किया. मामला सुनने के बाद एसडीपीओ महागामा ने बताया कि अब तक किसी भी थाने में इस संबंध में कोई लिखित सूचना नहीं मिली है. जब तक उनके परिवार या किसी अन्य व्यक्ति की तरफ से शिकायत नहीं मिलती, तब तक पुलिस कुछ नहीं कर सकती.
इसके बाद हमने बीजेपी कार्यकर्ता और गोड्डा के पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष संज़ीव मिश्रा से बात की. पूरी बात सुनने के बाद उन्होंने कहा कि हां, बीजेपी कार्यकर्ता इस बात से चिंतित हैं कि मेयर प्रबोध सोरेन का फोन लंबे समय से बंद है. हालांकि उन्होंने पार्टी बदलने वाली बात से असहमति जताई.
मामले पर हमने कांग्रेस गोड्डा जिलाध्यक्ष याहिया सिद्दीकी और कांग्रेस कार्यकर्ता खुसतर हुसनैन उर्फ बुलबुल से भी बात की. दोनों ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है. राजनीति संभावनाओं पर चलती है और किसी का किसी पार्टी को छोड़ना नई बात नहीं है, लेकिन प्रबोध सोरेन पार्टी बदल रहे हैं या नहीं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है.
महागामा के व्यवसायी और सामाजिक कार्यकर्ता राजीव रंजन भगत ने इसे दुखद बताया. उन्होंने कहा कि जनता भरोसे के साथ किसी को चुनाव जिताती है और चुनाव जीतने के बाद अगर कोई मोबाइल बंद कर संपर्क से बाहर हो जाए, तो इससे अच्छा संदेश नहीं जाता.
सुरक्षित हैं, लेकिन संपर्क में नहीं

Loktantra 19 ने अपने कुछ पुख्ता सूत्रों के माध्यम से प्रबोध सोरेन के परिवार से उनकी स्थिति जानने की कोशिश की. जानकारी मिली कि प्रबोध सोरेन अपने घरवालों से संपर्क में हैं और सुरक्षित हैं.
हालांकि वे सार्वजनिक रूप से संपर्क में क्यों नहीं हैं और उनका मोबाइल लगातार बंद क्यों है, इसके पीछे का कारण परिवार ने नहीं बताया. शायद यही कारण है कि परिवार पुलिस में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराना चाहता.
अगर मामला सुरक्षा, असुरक्षा या किसी निजी कार्यक्रम का नहीं है, तो फिलहाल सिर्फ दो ही संभावनाओं की चर्चा हो रही है. हालांकि अब तक ये केवल अफवाहें हैं और Loktantra 19 इन अफवाहों की पुष्टि नहीं करता.
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