Aanchal singh
RANCHI : झारखंड हाई कोर्ट ने रांची नगर निगम में प्रतिनियुक्ति पर आए दो इंजीनियरों को टाउन प्लानर के रूप में भवन नक्शा पास करने से रोक लगा दी है. कोर्ट ने साफ कहा है कि बिना तय योग्यता और अनुभव वाले अधिकारियों से यह काम कराना कानून के खिलाफ है.हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस एके राय शामिल हैं, ने आदेश दिया कि अब रांची नगर निगम में केवल नियमित रूप से नियुक्त असिस्टेंट टाउन प्लानर ही नक्शा स्वीकृत करेंगे.

कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
कोर्ट ने कहा कि अयोग्य इंजीनियरों से नक्शा पास कराने से अब तक स्वीकृत भवनों की वैधता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं. इससे आम लोगों को भविष्य में गंभीर परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिन्होंने कर्ज लेकर मकान या इमारत बनाई है.नियमों की अनदेखी का मामला सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि नगर निगम में अन्य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आए दो इंजीनियरों को टाउन प्लानर की तरह अधिकार दे दिए गए थे, जबकि वे भर्ती नियमों के अनुसार इस पद के लिए योग्य नहीं हैं.
वहीं सरकार द्वारा नियुक्त योग्य असिस्टेंट टाउन प्लानर से वास्तविक काम नहीं लिया जा रहा था.
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नगर आयुक्त को है कानूनी अधिकार
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि झारखंड नगर पालिका अधिनियम, 2011 की धारा 427 और 429 के अनुसार नक्शा पास करने का अधिकार नगर आयुक्त को है. किसी आंतरिक फ्लो चार्ट या विभागीय व्यवस्था के जरिए यह अधिकार टाउन प्लानर को देना कानून के खिलाफ है.कोर्ट ने एक मामले में 8 साल से अधिक समय तक आवेदन लंबित रखने को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताया और नगर निगम से पूछा कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं.नगर विकास विभाग द्वारा असिस्टेंट टाउन प्लानर को स्वतंत्र रूप से काम करने में देरी पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कानून बन चुका है, तो किसी मंत्री या अधिकारी को उसके क्रियान्वयन में बाधा डालने का अधिकार नहीं है. हाई कोर्ट ने आदेश दिया है कि अब टाउन प्लानिंग से जुड़े सभी तकनीकी कार्य और नक्शा स्वीकृति का काम केवल नियमों के तहत नियुक्त असिस्टेंट टाउन प्लानर ही करेंगे.मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी.
