RANCHI : रांची नगर निगम का आगामी चुनाव इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है. मेयर पद अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित होने के बावजूद सीट महिला आरक्षित नहीं है, जिसके चलते राजधानी रांची को पहला पुरुष मेयर मिलने की संभावना बनती दिख रही है. इसी ने JMM, Congress, BJP और निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच सियासी सरगर्मी तेज कर दी है.
BJP इस मौके को सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ शहरी नाराजगी भुनाने के रूप में देख रही है. पार्टी के भीतर संगठनात्मक रूप से मजबूत ST पुरुष नेताओं के नामों पर मंथन चल रहा है. BJP इस चुनाव में कानून-व्यवस्था, नगर निगम की कार्यप्रणाली और विकास के मुद्दों को धार देने की रणनीति बना रही है. इस फेहरिस्त में अशोक बड़ाइक का नाम सबसे ऊपर है.
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सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) इस सीट को आदिवासी नेतृत्व और सरकार की शहरी योजनाओं से जोड़कर देख रही है. पार्टी के भीतर ऐसे ST पुरुष चेहरों की तलाश तेज है, जिनकी संगठन में पकड़ के साथ-साथ शहरी मतदाताओं में स्वीकार्यता हो. माना जा रहा है कि JMM इस चुनाव में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की शहरी नीति को आधार बनाकर मैदान में उतरेगी. इस फेहरिस्त में बिरु तिर्की, सुजीत कुजूर, अंतु तिर्की, रामशरण तिर्की और अजित लकड़ा के नाम शामिल हैं.
वहीं कांग्रेस भी गठबंधन धर्म के तहत मजबूत ST पुरुष उम्मीदवार पर दांव लगाने की तैयारी में है. पार्टी का फोकस आदिवासी अधिकार, संविधान और शहरी बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर रहेगा. कांग्रेस के कुछ पुराने नेता और सामाजिक पृष्ठभूमि से जुड़े चेहरे खुद को संभावित प्रत्याशी के तौर पर पेश कर रहे हैं. इस फेहरिस्त में शिवा कच्छप हैं.
इस सियासी मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी भी अहम भूमिका निभा सकते हैं. कई स्थानीय आदिवासी चेहरे, जिनकी वार्ड और मोहल्ला स्तर पर मजबूत पकड़ है, चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. इनमें से एक नाम सोनु खलखो का है. ऐसे निर्दलीय उम्मीदवार बड़े दलों के समीकरण बिगाड़ने और मुकाबले को त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय बनाने की क्षमता रखते हैं.
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अगर ST वर्ग से कोई पुरुष उम्मीदवार मेयर बनता है, तो यह रांची नगर निगम के इतिहास में पहली बार होगा जब राजधानी को पुरुष मेयर मिलेगा. अब देखना यह होगा कि जनता JMM-Congress गठबंधन, BJP या किसी निर्दलीय चेहरे पर भरोसा जताकर इस ऐतिहासिक बदलाव की मुहर लगाती है.
