Akshay Kumar Jha
RANCHI : जुर्म की दुनिया में ‘स्वीकारोक्ति’ शब्द काफी अहम होता है. साधारण भाषा में बात करें तो स्वीकारोक्ति का अर्थ है किसी अपराध या गलती को स्वीकार करना. खासकर न्यायिक संदर्भ में आरोपी का अपना जुर्म कबूल करना. या सामान्य रूप से किसी तथ्य को सत्य मानना होता है. यह एक बयान होता है जिसमें व्यक्ति अपनी संलिप्तता स्वीकार करता है, और यह ‘स्वीकृति’ (Admission) से भिन्न है क्योंकि स्वीकारोक्ति (Confession) आपराधिक मामलों में अपने अपराध को स्वीकारने पर केंद्रित होती है, जो न्यायालय में महत्वपूर्ण सबूत होती है, बशर्ते वह स्वैच्छिक हो.
यह तो हो बात हो गयी कि स्वीकारोक्ति होती क्या है? सोमा मुंडा हत्कांड मामले में पुलिस ने पकड़े गए सभी आरोपियों से स्वीकारोक्ति बयान लिया है. पुलिस का दावा है कि सभी ने पुलिस के सामने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कबूल लिया है कि सोमा मुंडा हत्या की पठकथा गिरफ्तार किए गए आरोपियों ने लिखी थी. लेकिन जब स्वीकारोक्ति बयान की कॉपी Loktantra 19 के हाथ लगती है, तो पुलिस की कार्यशैली पर फिर से एक बार सवाल खड़े हो रहे हैं. देवब्रत नाथ शाहदेव ने अपने पूरे स्वीकारोक्ति बयान में कहीं भी नहीं लिखा है कि उसने सोमा हत्या हत्याकांड की स्क्रिप्ट लिखी हो या हत्याकांड में शामिल हो.
जानिए क्या कहा है देवब्रत ने अपने बयान में, और पुलिस का क्या है दावा
देवव्रत नाथ शाहदेव ने अपने बयान में कहा है कि मैं पुलिस पदाधिकारी के समक्ष बिना किसी डर और दबाव में अपना बयान दे रहा हूं.
- मैं अपने पैतृक संपत्ति में कई स्थानों पर प्राप्त जमीन को खोजबीन कर बिक्री करता हूं.
- देवब्रत ने अपने आवास के ऊपर रह रहे अभय सहाय और मृत्युंजय कुमार सिंह से जानपहचान की बात कबूली.
- बताया कि दोनों ने उन्हें कहा कि उनका खूंटी जिला में जीयरप्पा मौजा में करीब 30-32 एकड़ पैतृक जमीन है. उस जमीन पर कई साल पहले स्थानीय लोगों ने बटेदारी कर उन्हें कुछ अनाज दिया करते थे. लेकिन अब कोई नहीं देता है. साथ ही जमीन पर उनका कब्जा भी नहीं है.
- दोनों सभी जमीन मुझे बेचना चाहते थे. इसके एवज में उन्हें कुछ राशि प्रति डिसमिल देने की बात मैंने स्वीकारी थी. मेरा काम अब कागजों को दुरुस्त करना है और जमीन पर कब्जा करने का था.
यहां गौर करने वाली बात यह है कि जिस जमीन की खरीद ब्रिकी की बात देवब्रत कर रहा है, वो जमीन सोमा मुंडा हत्याकांड से जुड़ा हुआ ही नहीं है. देवब्रत खाता संख्या एक की बात कर रहा है और वहीं पुलिस बार-बार खाता नंबर दो पर हत्याकांड की साजिश रचने की बात कर रही है.
-आखिरी में देवब्रत अपने स्वीकारोक्ति में लिखता है कि उसने सोमा मुंडा की हत्या की बात मीडिया से सुनी. और स्वीकारोक्ति बयान का दी एंड हो जाता है.
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तथ्य जो ध्यान खींचते हैं
देवब्रत ने अपने स्वीकारोक्ति बयान में कहीं भी सोमा मुंडा का नाम नहीं लिया. पूरे स्वीकारोक्ति बयान में उसने नहीं कबूला है कि वो इस हत्याकांड के बारे में कुछ भी जानता है. ऐसे में सवाल उठने लाजिमी है कि कैसे पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया. Loktantra 19 पास एक वीडियो भी उपलब्ध है, जिसमें देवब्रत साफ तौर से कह रहा है कि उसने गिरफ्तारी कागजात पर हस्ताक्षर (साइन) किया ही नहीं है. अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर खूंटी पुलिस साबित क्या करना चाह रही है?
