GOMIA : गोमिया विधानसभा क्षेत्र में हाथियों का उत्पात अब केवल जंगलों और गांवों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मुद्दा विधानसभा की सीढ़ियों से होते हुए तीखी राजनीति के अखाड़े में तब्दील हो गया है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग मंत्री योगेंद्र प्रसाद द्वारा हाथियों के आतंक को ‘बीजेपी की देन’ बताने वाले बयान के बाद सियासी पारा चढ़ गया है.
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मंत्री का विवादित तर्क, बीजेपी उड़ा रही थी हाथी
क्षेत्र में हाथियों द्वारा जान-माल के नुकसान पर मीडिया से बात करते हुए मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने संवेदनशीलता और कटाक्ष का मिला-जुला रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि ये अचानक आए हाथी आखिर किसके हैं? क्या ये बीजेपी वाले हाथी हैं? पिछली सरकार के समय तो ‘हाथी उड़ाया’ जा रहा था. आज जो हाथियों का उत्पात बढ़ा है, वह बीजेपी की ही देन है. अगर उन्हें जनता की वेदना का अहसास होता, तो उस समय हाथी नहीं उड़ाते. हालांकि, मंत्री ने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री इस मामले में गंभीर हैं और एक उच्चस्तरीय बैठक कर प्रभावित परिवारों को राहत देने पर विचार कर रहे हैं.
पूर्व विधायक लंबोदर ने कहा कि यह पीड़ितों के साथ भद्दा मजाक है
मंत्री के इस बयान पर गोमिया के पूर्व विधायक डॉ. लंबोदर महतो ने कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने इसे सत्ता के अहंकार और संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया. डॉ. महतो ने पलटवार करते हुए कहा क्या रघुवर दास की सरकार से पहले हाथियों के हमले से मौतें नहीं होती थीं? ऐसे बेतुके बयान एक जिम्मेदार मंत्री को शोभा नहीं देता. जब बड़कीपुन्नू, महुआटांड़, कंडेर, तिलैया और झुमरा के लोग अपने घर और फसलें खो रहे हैं, तब मंत्री जी हास्य-व्यंग्य में व्यस्त हैं.
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दहशत और सरकारी तैयारी
एक ओर जहां नेताओं के बीच जुबानी जंग जारी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति भयावह बनी हुई है. हालांकि जिला प्रशासन ने बेघर हुए लोगों के लिए 34 भवनों को ‘अस्थायी आश्रय स्थल’ घोषित किया है. वन विभाग द्वारा ड्रोन कैमरों से हाथियों के झुंड को ट्रैक किया जा रहा है, लेकिन घने जंगल के कारण सफलता हाथ नहीं लग रही है. वहीं स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि चाहे हाथी बीजेपी का हो या विपक्ष का, पैरों तले फसल एक गरीब किसान की ही रौंदी जा रही है. नेताओं की बयानबाजी से किसी का पेट नहीं भरेगा, जनता को ठोस सुरक्षा और मुआवजा चाहिए.
