BOKARO : बोकारो में जिला प्रशासन की ओर से 07-08 जनवरी को “शब्द सरिता महोत्सव 2026” का आयोजन हो रहा है. इस कार्यक्रम में पुस्तक मेला सहित देश के कई नामचीन साहित्यकारों का समागम होगा. इस कार्यक्रम को लेकर स्वयं बोकारो डीसी अजय नाथ झा काफी सक्रिय हैं. कार्यक्रम को लेकर तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है.
इन कार्यक्रमों का महत्व
पुस्तक मेला व कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम साहित्य के प्रति रुझान बढ़ाने एवं ज्ञान वृद्धि के लिए अहम माने जाते हैं. इन कार्यक्रमों के जरिए आम जन डिजिटल दौर की आभासी दुनिया से परे किताबों की भौतिक संसार में प्रवेश करते हैं. आज के इस दौर में सारे टेक्स्ट फोन की स्क्रीन में समा जा रहे हैं, हालांकि इससे सुविधा तो मिलती है लेकिन आंखों को कष्ट देकर. वहीं एक किताब, फोन की चमकदार स्क्रीन के बजाय कागजों की भौतिक दुनिया से रु-ब-रु करवाती है. कवियों की कविताएं समाज में मौजूद कई रंगों से अवगत कराती है. भावप्रद कविताएं समाज को झकझोरती है, भावनाओं को जगाती हैं. हास्यप्रद कविताएं हंसाती है, खिलखिलाती हैं. प्रेम रस की कविताएं संसार के समस्त प्राणियों से प्रेम करना सिखाती हैं. और इस तरह साहित्य, समाज में बौद्धिकता का संचार करती हैं.
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स्थानीय रचनाकारों की उपेक्षा
इस तरह के कार्यक्रमों में स्थानीय रचनाकारों को यथोचित स्थान ना देना थोड़ा अखरता है. बोकारो में आयोजित हो रहे शब्द सरिता महोत्सव में स्थानीय रचनाकारों का प्रतिनिधित्व न के बराबर है. बोकारो का मतलब सिर्फ नगर नहीं है बल्कि बोकारो में नगर से ज्यादा गांव बसते हैं. गांवों में भी प्रतिभाएं प्रचुर मात्रा में है जिन्हें उचित स्थान और अवसर मिलना जरूरी है. जिला प्रशासन के द्वारा आयोजित इस तरह के कार्यक्रम उन छुपी हुई प्रतिभाओं को मंच देने का माध्यम बन सकते हैं. जिससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके.

क्या कहते हैं स्थानीय साहित्यकार
खोरठा व हिंदी के रचनाकार एवं खोरठा पत्रिका लुआठी के संपादक गिरिधारी गोस्वामी “आकाशखूंटी” का मानना है कि बोकारो साहित्यिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. यहां जिला स्तर पर अनेक साहित्यिक संस्थाएं सक्रिय हैं. यहां सैकड़ों ऐसे रचनाकार हैं जिनकी पुस्तकें प्रकाशित हैं. बोकारो जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को जिला के साहित्य और साहित्यकारों पर केंद्रित होना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के जो भी साहित्यकार आ रहे हैं उन सभी का स्वागत है. ऐसे कार्यक्रम निश्चित रूप से बोकारो की बौद्धिकता को बढ़ाएंगे.
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