RANCHI : भारतीय संविधान के तहत शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया है. सरकार का कर्तव्य है कि वह इसे सर्व सुलभ बनाए. सरकार द्वारा पढ़ने के लिए वंचित समुदाय के छात्रों को छात्रवृत्ति देना केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य के लिए मानव संसाधन पर किया गया एक निवेश है. एक वेलफेयर स्टेट का कर्तव्य होता है कि वो अपने राज्य के वंचित समूहों के छात्रों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्रवृत्ति मुहैया कराए. छात्रवृत्ति इसलिए आवश्यक है क्योंकि समाज में आर्थिक असमानता के कारण हर छात्र को समान अवसर नहीं मिल पाता है, छात्रवृत्ति यह सुनिश्चित करती है कि किसी मेधावी छात्र की पढ़ाई सिर्फ इसलिए न रुक जाए क्योंकि उसके पास पैसे नहीं हैं.
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लेकिन झारखंड में ओबीसी वर्ग के छात्रों की कहानी कुछ और ही है. यहां केंद्र और राज्य सरकार की खींचतान में छात्र पिसते जा रहे हैं. राज्य के छात्र अपने छात्रवृत्ति के हक के लिए लगातार आंदोलनरत हैं. राज्य सरकार गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल रही है.
केंद्र की अनदेखी
कुछ आंकड़ों के अनुसार राज्य सरकार ने यह समझाने की कोशिश की है कि किस प्रकार झारखंड के साथ केंद्र द्वारा भेदभाव किया जा रहा है:
राज्य के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा के अनुसार राज्य के ओबीसी छात्रों की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के संबंध में वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्र सरकार से 271.37 करोड़ रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केंद्र से मात्र 77.31 करोड़ रुपए का ही आवंटन प्राप्त हुआ. वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य सरकार की ओर से 253.21 करोड रुपए की मांग की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा केवल 3357 करोड रुपए का आवंटन किया गया. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 370 करोड़ रुपए की मांग की गई है.
नियम शिथिल करने की कवायद
ओबीसी वर्ग की छात्रवृत्ति को वितरित करने का प्रावधान यह है कि इस छात्रवृत्ति में केंद्र का 60 फीसदी और राज्य का 40 फीसदी हिस्सा रहता है, और जब तक केंद्र का अंशदान नहीं आ जाता राज्य के अंशदान की निकासी नहीं की जा सकती. प्रावधान के अनुसार दोनों राशि की निकासी एक साथ होती है. इस नियम को शिथिल करने का प्रस्ताव कल्याण विभाग ने वित्त विभाग को भेजा है. जिसमें केंद्र के अंशदान के बगैर ही राज्य की राशि को वितरित करने की सहमति देने की मांग की गई है.
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इस योजना के तहत प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 100 करोड़ और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए 300 करोड़ राशि जारी की जाएगी. इससे लगभग साढ़े पांच लाख ओबीसी छात्र लाभान्वित होंगे. इस संबंध में कल्याण मंत्री चमरा लिंडा का कहना है कि राज्य सरकार ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए प्रावधान में बदलाव करने जा रही है, ताकि राज्य का अंश छात्रों को दिया जा सके. हमने सारी विभागीय प्रक्रिया पूरी कर ली है. केंद्र से भी बकाया राशि की मांग की गई है.
