GODDA : झारखंड के स्वास्थ्य महकमे से एक ऐसी खबर आई है जिसने मानवता को झकझोरते हुए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. मेहरमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बंध्याकरण कराने आई एक महिला ‘नैना देवी’ की मौत हो गई है. परिजनों का आरोप है कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि डॉक्टरों की ‘सर्जिकल लापरवाही’ का नतीजा है.
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क्या है मामला
परिजनों का आरोप है कि महिला के बंध्याकरण के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मेहरमा अस्पताल पहुंचे थे. परिजनों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान मल-मूत्र से जुड़ी नस काट दी गई, जिसके बाद नैना देवी की हालत बिगड़ने लगी. महिला जिंदगी और मौत के बीच झूलने लगी. डॉक्टरों की लापरवाही के कारण महिला की हालत खराब होती चली गई.
हालत बिगड़ने पर परिजन, नैना देवी को मेहरमा के ही निजी क्लिनिक लेकर पहुंचे लेकिन वहां भी नैना का हालत स्थिर नहीं हुई. वहां के डॉक्टरों ने उसे भागलपुर प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर दिया. जब भागलपुर के प्राइवेट अस्पताल में भी नैना की हालत में सुधार नहीं हुआ तो वहां के डॉक्टरों ने भी देवघर के एम्स रेफर कर दिया. सरकारी अस्पताल की लापरवाही और रेफर-रेफर खेल के कारण नैना देवी जिंदगी की जंग हर गई. पीछे छोड़ गईं तीन मासूम बच्चे.
पहले भी हो चुकी है इस तरह की लापरवाही
चौंकाने वाली बात ये है कि परिजनों का दावा है ये कोई पहली घटना नहीं है. इससे पहले भी कई मरीज इसी तरह की लापरवाही का शिकार हो चुके हैं. उनमें से कुछ अब भी जिंदगी के लिए देवघर के एम्स में इलाजरत हैं.

जांच टीम का गठन
सिविल सर्जन डॉ. सुभाष शर्मा कहते हैं महिला का ऑपरेशन 24 फरवरी को हुआ था, 24 घंटे बाद डिस्चार्ज किया गया. मामला दुखद है. जांच टीम गठित कर दी गई है. सवाल ये है कि जांच के नाम पर कब तक लीपापोती होती रहेगी. क्या जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई होगी. या फिर हर बार की तरह फाइलों में दब जाएगा सच. एक मां की मौत. तीन मासूमों का उजड़ा बचपन. और सिस्टम की खामोशी. मेहरमा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोड्डा से ये दर्दनाक कहानी सिर्फ एक खबर नहीं बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल है.
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