RANCHI : झारखंड खेलों को लेकर समृद्ध रहा है. झारखंड जिसे हॉकी की नर्सरी कहा जाता है. जयपाल सिंह मुंडा, सिल्वानुस डुंगडुंग, निक्की प्रधान, सलीमा टेटे जैसे खिलाड़ियों ने अपना लोहा मनवाया है. क्रिकेट की बात करें तो महेंद्र सिंह धोनी, सौरव तिवारी, ईशान किशन जैसे खिलाड़ियों से झारखंड की क्रिकेट की टीम मजबूत रही है. तीरंदाजी की बात करें तो अन्तर्राष्ट्रीय तीरंदाज दीपिका कुमारी को कौन नहीं जानता? झारखंड के कौने कौने में खेलों की प्रतिभाएं मौजूद हैं बस उन्हें ढूंढने, उनकी प्रतिभा को निखारने और सही ट्रेनिंग देने की जरूरत है.
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स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की जरुरत
झारखंड के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से ट्रेनिंग देने के लिए झारखंड के पांच प्रमंडलों में से एक दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल के अंतर्गत रांची में हाई परफॉर्मेंस सेंटर कार्यरत है. अब बाकी के चार प्रमंडलों में भी स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की शुरूआत की जाएगी. इन सेंटरों का मुख्य उद्देश्य खिलाड़ियों को वैज्ञानिक आधार पर प्रशिक्षण देना एवं चोट से बचाव कर के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाना है. स्पोर्ट्स साइंस सेंटर में खिलाड़ियों के लिए वैज्ञानिक आधार पर विकास कार्य किया जाएगा, जहां उन्हें चोट से बचने, उम्र के हिसाब से मांसपेशियों का विकास, उचित प्रशिक्षण के साथ ओवर ट्रेनिंग से बचने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.
प्रत्येक सेंटर में फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूट्रीशनिस्ट, मसाजर, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग एक्सपर्ट उपलब्ध रहेंगे. सेंटर पर खिलाड़ियों के आहार, फिटनेस, स्वास्थ्य लाभ एवं मानसिक मजबूती पर काम किया जाएगा. ट्रेनिंग से पहले और ट्रेनिंग के बाद खिलाड़ियों का शारीरिक दक्षता मूल्यांकन किया जाएगा. उनकी कमियों को चिन्हित कर उन्हें स्पेशल ट्रेनिंग दिया जायेगा.
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क्या है स्पोर्ट्स साइंस सेंटर
नेशनल क्रिकेट एकेडमी, साई सेंटर, एवं ओलंपिक ट्रेनिंग सेंटर जैसे स्पोर्ट्स साइंस सेंटर में खिलाड़ियों की प्रत्येक गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है. इन सेंटरों में न्यूट्रीशन प्लान, इंजरी मैनेजमेंट एवं डेटा एनालिसिस के आधार पर खिलाड़ियों को निखारा जाता है.
सम्बंधित मंत्री ने कहा
खेल मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि खिलाड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से प्रशिक्षण मिलना चाहिए, हम परंपरागत तरीके से निकल कर आज के हिसाब से खिलाड़ियों को ट्रेनिंग उपलब्ध कराना चाहते हैं. इसी सोच के साथ स्पोर्ट्स साइंस सेंटरों को शुरू करना चाहते हैं ताकि खेलों की अंक तालिका में झारखंड अव्वल दिखे.
