Kolhan : कोल्हान क्षेत्र इन दिनों एक दंतैल हाथी की दहशत के साये में है. पश्चिमी सिंहभूम जिले के कोल्हान और चाईबासा फॉरेस्ट डिवीजन की सात वन रेंज में यह हाथी खुलेआम घूम रहा है. बीते सात दिनों में 12 अलग-अलग हमलों में 17 ग्रामीणों की जान जा चुकी है, जबकि 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.इसके बावजूद वन विभाग न तो हाथी की समय पर ट्रैकिंग कर सका और न ही किसी प्रभावी रोकथाम की व्यवस्था कर पाया.
सबसे दर्दनाक घटना मंगलवार रात को सामने आई, जब नोवामुंडी रेंज के बावड़िया गांव में दंतैल हाथी ने पुआल से बने कुंदा में सो रहे एक ही परिवार पर हमला कर चार लोगों को कुचलकर मार डाला. मृतकों में छोटे-छोटे मासूम बच्चे भी शामिल हैं, जिससे पूरे इलाके में मातम और आक्रोश का माहौल है.

मृतकों की पहचान सनातन मेराल (52 वर्ष), उनकी पत्नी जोलोको कुई (50 वर्ष), पुत्री दमयंती (8 वर्ष) और पुत्र मुंगडु (5 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी रात में घर के बाहर बने खलिहान में सो रहे थे.पास के कुंदा में सो रहे जयपाल मेराल (12 वर्ष) और सुशीला मेराल (7 वर्ष) ने किसी तरह भागकर जान बचाई. हालांकि, सुशीला को हाथी ने पटककर घायल कर दिया, जबकि जयपाल पेड़ पर चढ़कर बचने में सफल रहा.
हमले के बाद हाथी उल्लीसाई टोला पहुंचा, जहां उसने गुरुचरण लागुरी को कुचल दिया. गंभीर अवस्था में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.इस दौरान गोमिया लागुरी (11 वर्ष), हिन्दु लागुरी (8 वर्ष) और गुराय लादेया सहित चार अन्य लोग भी घायल हो गए.
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यह दंतैल हाथी 1 जनवरी को टोंटो प्रखंड के बांडीझारी और बिरसिंहहातु गांव में देखा गया था, जहां उसने दो ग्रामीणों की जान ले ली. इसके बाद 4 जनवरी को गोइलकेरा प्रखंड के संतरा वन क्षेत्र स्थित अमराई कितापी गांव में 47 वर्षीय महिला की जान ली गई. 5 जनवरी को मिस्त्रीबेड़ा गांव में एक और ग्रामीण की मौत हुई. 6 जनवरी को हाथी नोवामुंडी पहुंचा और सबसे बड़ा हमला किया.लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद वन विभाग लंबे समय तक निष्क्रिय रहा. मंगलवार की घटना के बाद विभाग हरकत में आया और हाथी की तलाश शुरू की गई. इस संबंध में पश्चिमी सिंहभूम के डीएफओ ने बताया कि हाथी को काबू में करना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वह एक ही रात में लगभग 25 किलोमीटर तक सफर कर लेता है, जिससे उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती है.
फिलहाल वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे रात में घर के बाहर न सोएं और सुरक्षित स्थानों पर रहें. विभाग के अनुसार हाथी मुख्य रूप से रात के समय ही हमला करता है. हालांकि, दंतैल हाथी अब भी खुले में घूम रहा है और ग्रामीणों के लिए खतरा बना हुआ है.
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लगातार हो रही मौतों के बाद भी हाथी पर नियंत्रण नहीं हो पाना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. अब देखना यह है कि विभाग कब तक इस दंतैल हाथी पर काबू पाने में सफल होता है और कब कोल्हान के ग्रामीणों को इस दहशत से राहत मिलती है.
