RANCHI : अंश-अंशिका के मिलने के बाद जिस तरह एक संगठित बच्चा चुराने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ वो बेहद भयानक है. किस तरह मानवता विहीन मनुष्य मासूम बच्चों को उनकी हंसती-खेलती दुनिया से चुरा कर दूर ले जाते हैं. और अंधकार की काली दुनिया में धकेल देते हैं. लड़कों से भीख मंगवाते हैं, लड़कियों से जिस्म फरोशी करवाते हैं. यहाँ तक की उनके अंगों की तस्करी करते हैं. सभ्य समाज में विचारशील मनुष्य तो कल्पना कर के ही सिहर जाए.
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इधर अंश-अंशिका वाले मामले के बाद पुलिस ऐसे मामलों को लेकर सक्रिय हुई है, वरना 22 नवंबर को गायब हुए कन्हैया की रपट तो 18 दिन बाद लिखी गई थी. टोटली सेंसलेस!
सुखद पहलू यह है कि करीब 60 दिन बाद ओरमांझी से गायब हुए 12 वर्षीय कन्हैया को कोडरमा से सही-सलामत बरामद कर लिया गया है. अंश-अंशिका को भी बरामद करने में पुलिस को नाकों चने चबाना पड़ा था.
पुलिस की एसआईटी और 7 राज्यों में छापा
कन्हैया को तलाश करने में पुलिस की एसआईटी की टीम 7 राज्यों में छापेमारी कर रही थी. इन चीजों की मॉनिटरिंग स्वयं रांची एसएसपी कर रहे थे. इसी बीच एक गुप्त सूचना के माध्यम से जानकारी मिलती है कि कन्हैया को कोडरमा में छिपा कर रखा गया है. रांची पुलिस, कोडरमा पुलिस के सहयोग से कन्हैया को सकुशल बरामद करने में कामयाब होती है.
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संवेदनहीन होते समाज की एक और तस्वीर रांची की है जहां बुढ़मू में एक तानाशाही पंचायत ने एक युवक को कथित पंप चोरी के इल्जाम में उसकी मां के सामने ही पीटकर मार डाला. ये केवल संवेदनहीनता की बात नहीं है बल्कि गिरती कानून व्यवस्था पर भी सवालिया निशान छोड़ती है. अंश-अंशिका और कन्हैया के माता-पिता सौभाग्यशाली हैं, वरना गायब होते झारखंड के भविष्य की चिंता किसे है?
