Akshay Kumar Jha
RANCHI : पहले यह सुनने को मिलता था कि झारखंड सरकार बहाली नहीं कर रही है. कभी यह सुनने को मिलता था कि सरकारी नौकरी वाली परीक्षाओं के पेपर लीक हो जाते हैं. लेकिन अब जो मामला सामने आया है, वो अलहदा है. बाकी सबसे अलग. दरअसल, एक ही तरह के पद के लिए जेपीएससी ने परीक्षा ली. लेकिन जॉइनिंग के बाद अब सभी नवनियुक्त लोगों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं हो रहा है. कहा जा रहा है कि राज्य सरकार की तरफ से चुने गए लोगों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. जानिए क्या है पूरा मामला.
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नियमावली के उलट हो रहा है काम
मामला झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा (JDLCCE-2023–नियमित) द्वारा चयनित 250 से अधिक जूनियर इंजीनियरों का है. यह परीक्षा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित की गई थी. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, पथ निर्माण विभाग (RCD), जल संसाधन विभाग (WRD), पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (DWSD), नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) में जूनियर इंजीनियर के पद समूह ‘बी’ के गैर-राजपत्रित पद हैं, जिनका वेतनमान स्तर ग्रेड 6 है. इन पदों पर चयन एक ही परीक्षा और एक ही मेरिट सूची के माध्यम से किया गया है. लेकिन नियुक्ति के बाद, नगर विकास एवं आवास विभाग (UDHD) के अंतर्गत तैनात जूनियर इंजीनियरों को DMA यानी नगरपालिका कैडर में रखा गया है और उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा भी नहीं दिया गया है. जबकि आधिकारिक विज्ञापन में ऐसी कोई शर्त नहीं बताई गई थी. इस कारण, नगर विकास एवं आवास विभाग के इंजीनियरों को शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के माध्यम से अनियमित वेतन, जीपीएफ/ओपीएस/पेंशन का अभाव, वेतन पर्ची ना मिलना, बैंक ऋण से वंचित होना और सेवा सुरक्षा का अभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जबकि इसी परीक्षा के माध्यम से अन्य विभागों में चयनित इंजीनियरों को सभी सरकारी लाभ मिल रहा है.
राज्य सरकार को इससे संबंधित कई अभ्यावेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं और मामला माननीय उच्च न्यायालय में भी लंबित है, लेकिन लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है. चूंकि यह मुद्दा 250 से अधिक इंजीनियरों और उनके परिवारों की आजीविका से जुड़ा है. इसलिए इसे काफी संवेदनशील माना जा रहा है. लेकिन राज्य सरकार की तरफ से किसी तरह का कोई संज्ञान इस मामले पर नहीं लिया जा रहा है. ऐसा होने से नवनियुक्त अभ्यर्थी काफी निराश हैं.
