RANCHI : हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव से पहले एक बड़ा फैसला लिया है. जिससे महागठबंधन में दरार की संभावना बन आई है. हालांकि, झामुमो ने सार्वजनिक तौर पर गठबंधन को लेकर नरम रुख बनाए रखा है. झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि असम में अलग चुनाव लड़ने का निर्णय रणनीतिक है और इसका झारखंड में महागठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड में कांग्रेस और झामुमो का गठबंधन पूरी तरह मजबूत और स्थिर है.
असम चुनाव से पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन अंततः कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी. इसके बाद झामुमो ने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाते हुए अकेले चुनाव मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया.
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दिल्ली में नहीं बनी बात
सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन रविवार को दिल्ली पहुंचे थे, जहां कांग्रेस नेतृत्व के साथ सीट शेयरिंग को लेकर अहम बैठक हुई. बताया जाता है कि कांग्रेस 7 सीटों पर अड़ी रही, जबकि झामुमो ज्यादा हिस्सेदारी चाहती थी. इसी गतिरोध के चलते दोनों दलों के बीच बात नहीं बन पाई और झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अलग राह चुन ली.

असम में भी पार्टी का चुनाव चिन्ह तीर-धनुष छाप
झामुमो ने असम में अपनी चुनावी तैयारी तेज कर दी है. पार्टी ने 21 सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर दी है. इन सीटों पर पार्टी खासतौर पर आदिवासी और टी-ट्राइब वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है. इसी कड़ी में JMM ने असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपने पारंपरिक चुनाव चिन्ह ‘तीर-कमान’ के आवंटन के लिए आवेदन किया था, जिसे मंजूरी मिल चुकी है. इससे पार्टी को झारखंड के बाहर भी अपनी पहचान के साथ चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा.

पहली उम्मीदवार को मिला पार्टी का चुनाव चिन्ह
उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू हो चुकी है. पार्टी ने सबसे पहले प्रीति रेखा बारला को चुनाव चिन्ह सौंपा, जिन्हें मंत्री चमरा लिंडा और नेता विनोद पांडेय ने आधिकारिक तौर पर उम्मीदवार बनाया. इसके अलावा सोनारी सीट से बलदेव तेली को टिकट दिया गया है. आने वाले दिनों में बाकी उम्मीदवारों के नाम भी घोषित किए जाएंगे.
राष्ट्रीय राजनीति पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो का यह फैसला केवल असम चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पार्टी की राष्ट्रीय विस्तार की रणनीति का हिस्सा है. झारखंड से बाहर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए झामुमो पूर्वोत्तर के राज्यों में संभावनाएं तलाश रही है, जहां आदिवासी और चाय बगान से जुड़े श्रमिकों की बड़ी आबादी है. असम में टी-ट्राइब समुदाय और आदिवासी वोट बैंक लंबे समय से चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं. झारखंड मुक्ति मोर्चा इन्हीं वर्गों को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति तैयार कर रही है. पार्टी का मानना है कि इन वर्गों के बीच उसकी पकड़ मजबूत है और इसी आधार पर वह भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती दे सकती है.
मुकाबला होगा दिलचस्प
वहीं, भाजपा के लिए भी यह चुनाव अहम है, क्योंकि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा के नेतृत्व में पार्टी अपनी सत्ता बरकरार रखने की कोशिश में है. ऐसे में झामुमो की एंट्री चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती है.
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झामुमो के स्टार प्रचारकों की लिस्ट जारी
झामुमो ने पहले ही अपने स्टार प्रचारकों की सूची जारी कर दी है, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन, पंकज मिश्रा समेत करीब 20 नेताओं को शामिल किया गया है. हेमंत सोरेन खुद चुनाव प्रचार में सक्रिय हैं और असम में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित कर चुके हैं. पार्टी आने वाले दिनों में और भी रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने की योजना बना रही है.
कुल मिलाकर, असम में झारखंड मुक्ति मोर्चा का ‘एकला चलो’ फैसला राज्य की चुनावी राजनीति में नया समीकरण पैदा कर सकता है. अब देखना होगा कि पार्टी अपने इस फैसले को वोटों में कितनी तब्दील कर पाती है.
