Loktantra Team
RANCHI : जब से महागठबंधन की सरकार बनी है, राज्य में ग्रामीण विकास विभाग का जिम्मा कांग्रेस के पास है. सबसे पहले आलमगीर आलम उसके बाद इरफान अंसारी और फिलहाल यह विभाग दीपिका पांडेय सिंह के पास है. मनरेगा योजना इसी विभाग के जिम्मे आता है. पूरे देश में कांग्रेस इस बात को लेकर प्रदर्शन कर रही है कि मनरेगा का नाम बदला जा रहा है. इसे अब मनरेगा नहीं बल्कि VG- G RAM G (जी राम जी) के नाम से जाना जाएगा. रांची में इस मामले को लेकर कांग्रेस के मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और रैली निकाली.
(वीडियो के जरिए समझिए क्या है पूरा मामला👆)
बार-बार सबूत के साथ बताया जा रहा है कि हुआ है घोटाला
Loktantra19.com ने इससे पहले भी मनरेगा में भारी घोटाले की खबर प्रकाशित की थी. और दिखाया भी था. लेकिन जांच के नाम पर देवघर प्रशासन की तरफ से सिर्फ आईवाश किया गया. सिर्फ उन्हीं मामलों की जांच की गयी, जो उदाहरण के तौर पर हमने दिखायी और बतायी थी. जबकि पूरे संथाल या कहें कि पूरे राज्य में ऐसे हजारों मामले हैं. मामले से जुड़े कई सबूत Loktantra19.com के पास है.
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संथाल के बाद अब धनबाद जामताड़ा में भी सामने आया मामला
इससे पहले हमने बताया था कि पूरे संथाल में मनरेगा के नाम पर काफी बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है. लेकिन प्रशासन की जांच में इस घोटाले को महज मानवीय भूल बताकर सिर्फ एक हाजर का जुर्माना लगाया गया. इस बार Loktantra19.com आपको बता रहा है कि संथाल के बाद हमारे हाथ ऐसे सबूत लगे हैं, जो साबित करता है कि धनबाद और जामताड़ा जिले में भी बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस घोटाले की जानकारी नीचे से लेकर ऊफर तक सभी को है. लेकिन कोई कर्मी या अधिकारी इस बारे चर्चा नहीं करता. इससे जाहिर होता है कि घोटाले में कौन-कौन शामिल है.
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जानिए कैसे होता है यह घोटाला
मामले को ऐसे समझिये : होता यह है कि, मनरेगा में किसी भी मजदूर को मजदूरी देने से पहले उसकी तस्वीर ली जाती है. फोटो वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है. Loktantra19.com आपको यह बताने की कोशिश कर रहा है, कि कैसे एक ही तस्वीर लगाकर बार-बार दूसरे मजदूरों के नाम पर भुगतान किया गया है. महिला के नाम पर पुरुष. पुरुष के नाम पर महिला. यहां तक कि नाबालिग बच्चे की तस्वीर लगाकर भुगतान ले लिया गया है. कहीं-कहीं तो किसी शादी समारोह में जमा लोगों की तस्वीर लगाकर भुगतान करा लिया गया. इतने संगीन आरोप को देवघर प्रशासन सिर्फ मानवीय भुल मान रहा है.
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