Vijay Thakur
GODDA : झारखंड के गोड्डा जिला अंतर्गत बोआरीजोर प्रखंड के ललमटिया स्थित सिदो-कान्हू चौक पर इस वर्ष सिदो-कान्हू जयंती के अवसर पर एक दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति देखने को मिली. जहां पूरे राज्य में संताल हूल के महान नायक सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू की प्रतिमाओं पर श्रद्धापूर्वक माल्यार्पण, साफ-सफाई और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, वहीं ललमटिया चौक पर दोपहर करीब 2 बजे तक उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण नहीं किया गया.
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यह दिन उनके बलिदान और संघर्ष को याद करने का
यह घटना स्थानीय लोगों के बीच चर्चा और आक्रोश का विषय बन गई है. आमतौर पर इस दिन आदिवासी समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और विभिन्न संगठनों द्वारा प्रतिमा स्थल पर एकत्रित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है. साथ ही कई स्थानों पर मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है, जो सिदो-कान्हू के बलिदान और उनके संघर्ष को याद करने का प्रतीक होता है. लेकिन ललमटिया में इस तरह की कोई गतिविधि समय पर न होने से लोगों में नाराजगी देखी जा रही है.
आखिर किसकी लापरवाही
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह न केवल महापुरुषों के प्रति अनादर है, बल्कि आदिवासी समाज की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाता है. क्षेत्र में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों इस महत्वपूर्ण अवसर पर आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि समय पर उपस्थित नहीं हुए. क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी, आपसी समन्वय की कमी या फिर किसी अन्य कारण से यह स्थिति उत्पन्न हुई — यह जांच का विषय बन गया है.
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स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो. सिदो-कान्हू जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की जयंती पर इस प्रकार की उदासीनता समाज के लिए चिंताजनक संकेत मानी जा रही है.
