Akshay Kumar Jha
RANCHI : आईएएस अधिकारियों का विवादों में रहना कोई बड़ी बात नहीं है. लेकिन सवाल तो तब खड़ा होता है, जब एक ही आईएएस अधिकारी बार-बार विवादों में ही रहे. विवाद इतने कि कभी सरकार के आंखों के तारे बने तो कभी इन्हें बिना पद के कार्मिक में योगदान देना पड़ा. जब उन्हें चाईबासा का डीसी बनाया गया तो उनपर मनरेगा में करोड़ों का घोटाला करने का आरोप लगा. मामला अब भी कोर्ट में विचाराधीन है. इतना ही नहीं आईएएस के श्रीनिवासन के खिलाफ छह बार एसीबी में शिकायत की गयी. एसीबी ने सरकार से जांच शुरू करने का आदेश भी मांगा. लेकिन मामला संभल गया. पूजा सिंघल पर जब ईडी कार्रवाई कर रहा था, तो के श्रीनिवासन भी ईडी के रडार पर थे. क्योंकि पूजा सिंघल से पहले वो ही खनन विभाग के सचिव थे. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव पद से उन्हें सरकार ने हटाकर कार्मिक विभाग में वेटिंग फॉर पोस्टिंग रखा गया. आखिर में वो जिस विभाग में थे उसकी मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने उनका सीआर ही खराब कर दिया. लेकिन फिर भी वो ऊर्जा जैसे पावरफुल विभाग के तीनों मेजर पोस्ट के अफसर बन गए. मतलब ऊर्जा विभाग के सुपरबॉस.
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मंत्री ने की ऐसी टिप्पणी जो पूरी उम्र के श्रीनिवासन को परेशान करेगा
विभागों के मंत्री को अधिकार है कि वो अपने विभाग के सचिवों के सीआर पर उनके काम के मुताबिक नंबर दे और टिप्पणी कर सके. ग्रामीण विकास और ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव रहे के श्रीनिवासन के सीआर पर मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने जो टिप्पणी की है, वो चौंकाने वाला और काफी नकारात्मक है. सचिवों के सीआर पर नंबर और टिप्पणी देने के लिए एक फॉर्मेट होता है. मंत्री को अपने सचिवों के काम करने का तरीका, प्रोफेशनल एप्रोच और विजन पर नंबर देना होता है. न्यूनतम नंबर एक और अधिकतम 10 नंबर देने का प्रावधान है. अमूमन मंत्री अपने सचिवों को 9 से ज्यादा नंबर देते हैं. लेकिन मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने के श्रीनिवासन को मात्र 7.2 नंबर ही दिया. नंबर तो फिर भी बर्दाश्त करने के लिए लायक था. लेकिन मंत्री दीपिका ने आईएएस अधिकारी के श्रीनिवासन पर जो टिप्पणी की है वो हैरत में डालने वाला और काफी नकारात्मक है. मंत्री दीपिका ने के श्रीनिवासन के सीआर पर लिखा है कि के श्रीनिवासन में नेतृत्व की क्षमता बिलकुल नहीं है. आगे दीपिका ने लिखा है कि उनमें कम्युनिकेसन स्किल की घोर कमी है. मंत्री दीपिका इतने पर ही नहीं रुकती है. वो लिखती है कि विभाग के ज्यादातर कर्मी के श्रीनिवासन के काम से संतुष्ट नहीं है. सभी कर्मी के. श्रीनिवासन से नाराज रहते हैं. ना ही के श्रीनिवासन कोई नए आइडिया के बारे बात करते हैं और ना ही समय पर समीक्षा बैठक करते हैं.
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फिर भी सरकार ने नवाजा प्रमुख विभाग
इतने आरोपों से घिरे आईएएस के श्रीनिवासन को सरकार की तरफ से ऊर्जा विभाग का सचिव, सीएमडी और जेबीवीएनएल के एमडी तीनों पद का सुपरबॉस बना दिया गया. बातें अब हो रही हैं कि जब किसी अधिकारी पर इतने आरोप लगे हों. सरकार की ही तरफ से तीन-तीन बार शो-कॉज किया गया हो. घोटाला करने का आरोप लगा हो. सरकार की ही तरफ से कार्मिक में योगदान देने जैसा आदेश मिला हो. फिर भी उन्हें उर्जा जैसे विभाग का सुपर बॉस बनाना सवालों के घेरे में आता है.
