RANCHI : ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर में कमीशन और मनी लांड्रिंग के आरोप में जेल में बंद पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमएम सुंदरेश और न्यायाधीश एन कोटेश्वर सिंह की पीठ में इस मामले की सुनवाई हुई. खंडपीठ ने मामले में चार सप्ताह के अंदर महत्वपूर्ण गवाहों की जांच करने का आदेश दिया. इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित करने का निर्देश दिया.
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जमानत की दलीलें
अदालत में सुनवाई के दौरान आलमगीर आलम की ओर से कहा गया कि वह 76 वर्ष के हैं और लगभग 2 साल से जेल में बंद हैं. मामले की सुनवाई में प्रगति भी संतोषजनक नहीं है, साथ ही सरकार ने मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति भी नहीं दी है व इस मामले में गवाहों की जांच भी नहीं हुई है. इसके अलावा ईडी ने मामले में तीन और पूरक आरोप पत्र दाखिल किए हैं, इन सभी की सुनवाई एक साथ होनी है तो इसमें कितना समय लगेगा पता नहीं. इसलिए अभियुक्त को जमानत पर रिहा कर दिया जाना चाहिए.
इस पर अदालत ने चार सप्ताह के अंदर गवाहों की जांच का आदेश दिया. संजीव लाल के मामले में भी यही आदेश दिया गया.
क्या था मामला
गौरतलब है कि ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर में कमीशन और मनी लांड्रिंग के आरोप में ईडी ने 6 मई 2024 को संजीव लाल, जहांगीर आलम सहित अन्य के ठिकानों पर छापा मारा था. छापेमारी के दौरान जहांगीर के ठिकाने से 32.20 करोड रुपए जब्त किए गए थे जबकि संजीव लाल के घर से 10.05 लाख रुपए के अलावा एक डायरी भी मिली थी जिसमें कमीशन की रकम हिसाब किताब था. ईडी ने दो दिनों की लंबी पूछताछ के बाद 15 मई 2024 को ग्रामीण विकास विभाग के तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था, वही मंत्री के आप्त सचिव संजीव लाल और उसके करीबी जहांगीर आलम की गिरफ्तारी 7 मई 2024 को हुई थी.
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