RANCHI : धुरंधर मूवी का प्रिंस खान कनेक्शन आज आपको हम बताने जा रहे हैँ , बहुत ही आसान भाषा मे , की आखिर क्यों बाबूलाल मरांडी को धुरंधर मोवी का नाम लेकर गैंगस्टर प्रिंस खान , प्रिंस खान के सूटर सप्लायर राणा राहुल सिंह और चीफ सेक्रेटरी अविनाश कुमार के लिए फेसबुक पोस्ट लिखना पद गया.झारखंड मे आजकल सिर्फ खबरें नहीं बन रहीं बल्कि कहानियां लिखी जा रही हैं .और ये कहानियां किसी फिल्म की स्क्रिप्ट से कम नहीं लगतीं ,फर्क बस इतना है कि ये धुरंधर फिल्म नहीं है ,ये रियल लाइफ है और इस रियल लाइफ के केंद्र में है एक नाम प्रिंस खान .bवही प्रिंस खान जिस पर आरोप है कि उसने झारखंड में डर का ऐसा नेटवर्क खड़ा किया जो सिर्फ जमीन पर नहीं बल्कि सिस्टम के अंदर तक फैला हुआ है .लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती असली सवाल तो अब शुरू होता है ..क्योंकि इस पूरे मामले में एक ऐसा नाम सामने आया है जिसने इस केस को सिर्फ क्राइम स्टोरी नहीं रहने दिया बल्कि इसे पॉलिटिकल और सिस्टम फेल्योर की बड़ी बहस बना दिया है . नाम राणा राहुल सिंह .
अखबार में छपी एक रिपोर्ट और उसमें किया गया दावा कि प्रिंस खान के लिए शूटर उपलब्ध कराने वाले राणा राहुल सिंह को रांची पुलिस ने बॉडीगार्ड दिया था .अब आप खुद सोचिए अगर ये आरोप सही हैं तो इसका मतलब क्या निकलता है .क्या सिस्टम खुद उन लोगों को सुरक्षा दे रहा था जिन पर अपराधियों से कनेक्शन के आरोप हैं या फिर ये सिर्फ एक संयोग है ..एक गलती है या फिर इससे कहीं ज्यादा गंभीर कुछ . रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राणा राहुल सिंह लंबे समय तक सरकारी सुरक्षा में रहा और इतना ही नहीं तस्वीरें भी सामने आईं जिनमें वह कथित तौर पर बड़े अधिकारियों के साथ नजर आ रहा है .और वो बड़े अधिकारी और कोई नहीं बल्कि खुद राज्य के चीफ सेक्रेटरी अविनाश कुमार हैँ . अब सवाल ये नहीं है कि तस्वीर में कौन है सवाल ये है कि एक ऐसे शख्स की पहुंच इतनी ऊपर तक कैसे हो सकती है जिस पर इतने गंभीर आरोप लग रहे हैं की वो एक गैंगस्टर को रांची शहर मे शूटर उपलब्ध करवाता था.
और यहीं से एंट्री होती है झारखंड की राजनीति के एक बड़े चेहरे की यानि Babulal Marandi की , जिन्होंने इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट किया और ऐसे सवाल खड़े किए जो सीधे सीधे सिस्टम की जड़ों को हिला देते हैं . बाबूलाल अपने पोस्ट में कहते हैं कि इन दिनों धुरंधर फिल्म के जरिए विदेश में बैठकर भारत में आतंक फैलाने वाले नेटवर्क की चर्चा हो रही है , लेकिन झारखंड में भी पिछले कुछ सालों से कुछ ऐसा ही खेल चल रहा है . अब ये एक बड़ा आरोप है और जब नेता प्रतिपक्ष इस तरह की बात कहता है तो उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता . उन्होंने यह भी लिखा कि झारखंड में कुख्यात अपराधी प्रिंस खान का आतंक लगातार बढ़ता गया और इसके पीछे सिर्फ उसका नेटवर्क नहीं बल्कि पुलिस की शिथिलता और राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर कारण भी हो सकते हैं . यानी सवाल सिर्फ अपराधी पर नहीं है सवाल उन लोगों पर भी है जो सिस्टम के अंदर बैठकर इस पूरे खेल को होने दे रहे थे या शायद नजरअंदाज कर रहे थे .

बाबूलाल ने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि प्रिंस खान फर्जी पासपोर्ट बनवाकर देश से बाहर भागने में सफल रहा और यह अपने आप में एक बहुत बड़ा सवाल है . क्योंकि बिना सिस्टम की चूक के या बिना किसी अंदरूनी मदद के क्या ऐसा संभव है . .. और अब आते हैं उस हिस्से पर जिसने इस पूरे मामले को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया मरांडी ने लिखा कि हाल ही में रांची में हुई एक हत्या की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ी वैसे वैसे प्रिंस खान के करीबियों के नाम सामने आने लगे और उन्हीं में से एक नाम था राणा राहुल सिंह . अब अगर इन सभी बातों को जोड़कर देखा जाए तो एक तस्वीर बनती है ..,एक ऐसा नेटवर्क जिसमें अपराध राजनीति और सिस्टम तीनों के बीच कोई न कोई कड़ी नजर आती है लेकिन ध्यान रहे ये अभी आरोप हैं और इनकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी , लेकिन सवाल उठाना जरूरी है क्योंकि लोकतंत्र में सवाल ही जवाब तक पहुंचने का रास्ता बनाते हैं
बाबूलाल ने अपने पोस्ट में मुख्यमंत्री Hemant Soren से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने की मांग की है .साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय से भी अपील की है कि इस नेटवर्क की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए . उन्होंने यह भी कहा कि वायरल ऑडियो या तस्वीरें और जिन अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि आखिर सच क्या है और झारखंड में चल क्या रहा है .

एक बड़ा सवाल ये भी है की क्या ये सिर्फ एक अपराधी की कहानी है या फिर ये उस सिस्टम की कहानी है जहां कहीं न कहीं कोई धुरंधर स्क्रिप्ट लिखी जा रही है . क्या ये सिर्फ एक गैंगस्टर का नेटवर्क है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल है जो अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है . आखिर क्या वजह है कि एक आरोपी को सुरक्षा मिलती है .. तस्वीरें सामने आती हैं और फिर वही नाम किसी बड़े अपराधी के नेटवर्क से जुड़कर सामने आता है . और सबसे अहम सवाल की क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर ये भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा.
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झारखंड की जनता आज जवाब चाहती है क्योंकि ये मामला सिर्फ एक व्यक्ति या एक घटना का नहीं है ये मामला है भरोसे का उस भरोसे का जो जनता सिस्टम पर करती है . अगर वही सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाए तो फिर भरोसा किस पर किया जाए . तस्वीरें बहुत कुछ कहती हैं पोस्ट बहुत कुछ संकेत देता है लेकिन सच क्या है ये सिर्फ जांच ही बता सकती है और जांच भी ऐसी जो निष्पक्ष हो पारदर्शी हो और किसी दबाव में न हो . क्योंकि अगर सच सामने नहीं आया तो ये सवाल ये शक और ये डर लगातार बढ़ता रहेगा और यही किसी भी समाज के लिए सबसे खतरनाक स्थिति होती है . फिलहाल हम आरोपों की पुष्टि नहीं कर रहे इसीलिए चीफ सेक्रेटरी अविनाश कुमार का नाम भी हमसे सिर्फ 2 बार लिया है. . लेकिन हम सवाल जरूर उठा रहे हैं क्योंकि सवाल उठाना ही पत्रकारिता का पहला कर्तव्य है . और जब तक जवाब नहीं मिलते तब तक ये सवाल यूं ही गूंजते रहेंगे.
अंत मे एक सवाल हमारे मन मे ये भी कब से गूंज रहा है , और बाबूलाल मरांडी जी का नाम लेकर गूंज रहा है की ऐसी ही एक तस्वीर आपकी भी धनबाद के सफ़ेद पोश कोयला माफिया L B singh के साथ दिखी थी … खैर उसपर कभी और बात करेंगे , बाकि आपको ये खबर , और झारखण्ड की रियल life धुरंधर script कैसी लगी हमें जरूर बताईयेगा.

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