Ritika
RANCHI : झारखंड के देवघर से सामने आई एक तस्वीर ने लोगों के मन में पुलिस को लेकर बनी छवि पर सोचने को विवश कर दिया है. अक्सर पुलिस की वर्दी को देखकर लोगों के मन में डर, सख्ती और कानून की कठोर छवि उभरती है, लेकिन इस तस्वीर ने यह साबित कर दिया कि वर्दी के पीछे भी एक संवेदनशील इंसान होता है. तस्वीर में देवघर पुलिस का एक सब-इंस्पेक्टर एक बुजुर्ग के घर पहुंचा है, लेकिन किसी अपराध की जांच या कानूनी कार्रवाई के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ यह पूछने के लिए कि “आप ठीक हैं या नहीं.” यह दृश्य बताता है कि पुलिस सिर्फ कानून की रखवाली ही नहीं करती, बल्कि समाज के कमजोर और अकेले लोगों के लिए सहारा भी बन सकती है. यही मानवीय पहल देवघर पुलिस की “सम्मान योजना” को खास बनाती है, जिसने बुजुर्गों के जीवन में सुरक्षा और भरोसे की नई रोशनी जगा दी है. इस योजना की शुरुआत जिले के पुलिस अधीक्षक सौरभ कुमार की पहल पर हुई है, जिसका मकसद सिर्फ अपराध रोकना नहीं बल्कि उन बुजुर्गों को यह एहसास दिलाना है कि इस शहर में पुलिस उनके साथ उनके अपने परिवार की तरह खड़ी है.
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पूरे घर की चाक चौबंद सुरक्षा व्यवस्था
इस योजना के तहत 70 साल से अधिक उम्र के ऐसे बुजुर्ग जो अकेले रहते हैं या जिनका सहारा कम है, उन्हें पुलिस के साथ जोड़ा जा रहा है. अब तक 26 से अधिक बुजुर्ग इस योजना का हिस्सा बन चुके हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सीधे पुलिस ने अपने हाथों में ली है. योजना के तहत हर बुजुर्ग के साथ एक सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को जोड़ा जाता है, जो न केवल उनकी सुरक्षा की जांच करता है बल्कि हर 15 दिन में उनके घर जाकर उनका हाल-चाल भी पूछता है. यह अधिकारी घर के दरवाजों की मजबूती, आस-पास के माहौल, नौकरों और किरायेदारों के पुलिस वेरिफिकेशन तक की पूरी प्रक्रिया खुद देखता है ताकि किसी भी तरह का खतरा बुजुर्गों तक पहुंच ही न सके. कई बुजुर्ग आर्थिक रूप से सक्षम हैं, लेकिन अकेलापन उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है और ऐसे में अक्सर असामाजिक तत्व उनकी संपत्ति पर नजर गड़ाने लगते हैं. देवघर पुलिस ने इस खतरे को समझते हुए ऐसे लोगों पर भी नजर रखनी शुरू कर दी है जो बुजुर्गों को निशाना बना सकते हैं.
छोटी-छोटी समस्याओं का भी निदान
इस योजना की सबसे खास बात यह है कि पुलिस सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि बुजुर्गों की छोटी-छोटी समस्याओं को भी हल करने की कोशिश कर रही है. हाल ही में कुछ बुजुर्गों ने अपने घर के सामने टूटी नाली की शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने संबंधित विभाग से समन्वय कर उसे ठीक करवाने में मदद की. यह दिखाता है कि पुलिस का यह प्रयास सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है बल्कि समाज में भरोसा और सम्मान का माहौल बनाने की कोशिश भी है.
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“सम्मान योजना’ की प्रक्रिया बेहद सरल
योजना से जुड़ने की प्रक्रिया भी बेहद सरल रखी गई है ताकि ज्यादा से ज्यादा बुजुर्ग इसका लाभ उठा सकें. 70 साल से अधिक उम्र के अकेले रह रहे बुजुर्ग 9296913007 नंबर पर कॉल करके अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद पुलिस खुद उनके घर पहुंचकर पूरी प्रोफाइल तैयार करती है और उन्हें एक पंजीकरण स्लिप देती है. इसके बाद घर का सुरक्षा ऑडिट किया जाता है और घरेलू सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाता है. सबसे अहम बात यह है कि योजना के तहत हर 15 दिन में पुलिस अधिकारी का बुजुर्ग से मिलना अनिवार्य है, ताकि उन्हें कभी अकेलापन या असुरक्षा महसूस न हो. इस पहल का असर अब देवघर के बुजुर्गों के बीच साफ दिखाई देने लगा है.
सम्मान और भरोसे को मजबूत करने वाला कदम
कई बुजुर्गों का कहना है कि यह योजना सिर्फ सुरक्षा कार्यक्रम नहीं बल्कि भरोसे और सम्मान की भावना को मजबूत करने वाला कदम है. देवघर के बुजुर्ग राम किशोर सिंह बताते हैं कि कुछ समय पहले बुजुर्गों का एक प्रतिनिधिमंडल पुलिस अधीक्षक से मिला था और सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई थी, जिसका सकारात्मक परिणाम आज “सम्मान योजना” के रूप में सामने आया है. वहीं 75 वर्षीय योगेंद्र झा का कहना है कि देवघर एक धार्मिक नगरी है, जहां साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और खासकर सावन जैसे अवसरों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं. ऐसे में जिन घरों में सिर्फ बुजुर्ग रहते हैं वे अक्सर आसान निशाना बन जाते हैं, लेकिन अब पुलिस की इस पहल से उन्हें एक नया सहारा मिला है.
नियम-कानून के साथ संवेदना भी
देवघर पुलिस की यह तस्वीर इसलिए भी खास है क्योंकि यह बताती है कि अगर पुलिस चाहे तो समाज के साथ उसका रिश्ता डर का नहीं बल्कि भरोसे का भी हो सकता है. जब वर्दी में खड़ा एक अधिकारी किसी बुजुर्ग के दरवाजे पर सिर्फ यह पूछने पहुंचता है कि “आप ठीक हैं या नहीं”, तो वह पल सिर्फ एक मुलाकात नहीं बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल बन जाता है. यही वजह है कि देवघर पुलिस की यह पहल अब लोगों के दिलों में जगह बना रही है और यह संदेश दे रही है कि कानून की ताकत के साथ-साथ संवेदना भी उतनी ही जरूरी है.
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