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RANCHI : देवघर नगर निगम की बोर्ड बैठक में एक अलग ही आदर्श उदाहरण देखने को मिला, जब डिप्टी मेयर टिप चटर्जी ने जनता के टैक्स के पैसे से मिलने वाले वाहन और ईंधन को लेने से साफ इनकार कर दिया. बैठक में मेयर और डिप्टी मेयर के लिए निगम की ओर से वाहन और ईंधन की सुविधा देने के प्रस्ताव पर लंबी बहस हुई, लेकिन डिप्टी मेयर की आपत्ति के बाद इस प्रस्ताव को फिलहाल सुरक्षित रख लिया गया. इस मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले रांची, धनबाद जैसे अन्य नगर निगमों से भी रिपोर्ट मंगाने का फैसला किया गया है.
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जनता का पैसा, जनता के लिए
बैठक के दौरान जब यह जानकारी सामने आई कि डिप्टी मेयर के लिए वाहन और ईंधन की सुविधा देने का प्रस्ताव है, तो उन्होंने तुरंत अपनी असहमति जाहिर कर दी. उनका कहना था कि जनता के टैक्स का पैसा जनता के कामों पर खर्च होना चाहिए, न कि जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत सुविधाओं पर. डिप्टी मेयर के पति भोला सिंह ने भी इस प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया और कहा कि वे स्वयं वाहन और ईंधन की व्यवस्था करने में सक्षम हैं. उन्होंने स्पष्ट कहा कि निगम के कामों का निरीक्षण करने, कार्यालय आने-जाने या शहर में भ्रमण करने के लिए उन्हें निगम से किसी प्रकार की सुविधा लेने की जरूरत नहीं है. डिप्टी मेयर ने भी अपनी यही भावना नगर निगम को बता दी है. उन्होंने कहा कि वे सेवा करने के लिए इस पद पर आई हैं, न कि सुविधाएं लेने के लिए.

जनसेवा की सच्ची मिसाल
एक ओर जहां कई जगहों पर मुखिया बनने के बाद लोग बड़े-बड़े भवन खड़ा कर लेते हैं, कुछ विधायक लाखों रुपये के फर्नीचर की मांग करते नजर आते हैं, वहीं दूसरी ओर देवघर की यह तस्वीर एक अलग संदेश देती है. यह घटना दिखाती है कि अगर जनप्रतिनिधि चाहें तो जनता के पैसे का सही जगह, सही उपयोग कर सकते हैं और सेवा की भावना से काम कर सकते हैं. देवघर की डिप्टी मेयर का यह फैसला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और इसे जनसेवा की सच्ची मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है.
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