Vijay Thakur
GODDA : सिदो-कान्हो की जयंती के अवसर पर कारगिल चौक पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) कार्यकर्ताओं द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने माल्यार्पण कर महानायकों को नमन किया. ‘हूल नायक सिदो-कान्हो अमर रहें’ के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा. कार्यक्रम की अगुवाई झामुमो जिला अध्यक्ष प्रेमनंदन मंडल ने की. इस मौके पर जिले के विभिन्न प्रखंडों से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. सभी ने एकजुट होकर सिदो-कान्हो के संघर्ष, त्याग और बलिदान को याद किया.
इसे भी पढ़ें : तेवर में चम्पाई सोरेन, विस्थापितों के मुद्दे पर बोकारो से बड़े आंदोलन का ऐलान

आदिवासी नायकों के योगदान की अनदेखी
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सिदो-कान्हो द्वारा अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ किया गया विद्रोह केवल एक आंदोलन नहीं था, बल्कि आदिवासी समाज के अस्तित्व और सम्मान की लड़ाई थी. उन्होंने कहा कि संथाल हूल भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, लेकिन इतिहासकारों द्वारा इसके साथ न्याय नहीं किया गया. झामुमो जिला अध्यक्ष प्रेमनंदन कुमार मंडल ने आरोप लगाया कि आदिवासी नायकों के योगदान को इतिहास में सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण नई पीढ़ी उनके वास्तविक महत्व से अनभिज्ञ रह जाती है. उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सिदो-कान्हो को केवल स्वतंत्रता सेनानी कहना उनके योगदान को सीमित करना है. उन्हें ‘हूल नायक’ के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए, क्योंकि उन्होंने आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया और अन्याय के खिलाफ संघर्ष की मिसाल पेश की.

‘हूल नायक’ का दर्जा
कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मांग उठाई कि इतिहास की पुस्तकों में संशोधन कर सिदो-कान्हो को ‘हूल नायक’ के रूप में दर्ज किया जाए और उनके योगदान को उचित सम्मान दिया जाए. साथ ही यह संकल्प लिया गया कि आदिवासी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा. इस अवसर पर तालाबाबू हांसदा, इंद्रजीत पंडित, अब्दुल अंसारी, विजय महतो, राजू सोरेन, मंगल दे, जर्मन बास्की, दीपक दत्ता, सावन टुडू सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
इसे भी पढ़ें : झारखंड में हीट का असर शुरू, सभी जिलों में पारा 30 डिग्री पार
