RANCHI : संथाल परपगना का पाकुड़ और साहेबगंज जिला अवैध खनन के लिए बदनाम है. लेकिन कभी भी जिला प्रशासन की तरफ से किसी तरह की सख्त कार्रवाई देखने को नहीं मिलती. इसलिए अवैध खनन करने वाले माफिया के हौसले बुलंद रहते हैं. हर जांच के नाम पर लीपापोती हो जाती है. फाइल इस अधिकारी के टेबल से उस अधिकारी के टेबल पर टहलते रहती है. आखिर में अधिकारियों का तबादला हो जाता है, और अधिकारिक बयान यह आता है कि यह मामला मेरे कार्यकाल का नहीं. ऐसा ही कुछ फिर से एक बार देखने को मिल रहा है. मामला पाकुड़ जिले के कानूपुर मौजा का. आरोपी हैं मोहम्मद अली खान उर्फ मुर्तुजा और टुटुल खान.
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एसडीएम की जांच में अवैध खनन की पुष्टि लेकिन कार्रवाई नहीं
पाकुड़ में जिला प्रशासन को शिकायत मिली कि कानूपुर मौजा (जो कि बंगाल की सीमा से लगा हुआ है) में बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है. मौजूदा एसडीएम साइमन मरांडी और सीओ ने स्थल निरीक्षण किया. जांच में सामने आया कि करीब 9.76 एकड़ जमीन पर अवैध खनन हुआ है. बकायदा एसडीएम साहब ने जांच रिपोर्ट में अवैध खनन की पुष्टि कर डीएमओ राजेश कुमार के पास भेज दी. अब डीएमओ साहब को आगे की कार्रवाई करनी थी. जांच में यह बात सामने या कि मोहम्मद अली खान उर्फ मुर्तुजा और टुटुल खान पूरे मामले के किंगपिंग हैं. ऐसा सभी जानते हैं. साथ ही लोकतंत्र19 के पुख्ता सूत्र बताते हैं कि डीएमओ ने कार्रवाई की अनुशंसा की और भारी-भरकम फाइन लगाकर फाइल तैयार कर ली. लेकिन फाइल सिर्फ तैयार ही हुई. उसपर अब-तक कार्रवाई नहीं हुई है. क्योंकि जिस जुर्माने की अनुशंसा डीएमओ ने की है वो रमक काफी बड़ी है. सूत्र बताते हैं कि मामला करोड़ों का है.
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समझिए प्रशासन कैसे कर रहा है लीपापोती
- इस मामले पर Loktantra19.com ने जिले के एसडीएम साइमन मरांडी से बात की. उन्होंने इस बात की पुष्टि तो की कि अवैध खनन की जांच हुई है और अवैध खनन हुआ भी है. लेकिन कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करते हुए उन्होंने कहा कि मामले पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है. कहा कि मामले को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है. कमेटी में डीसी, एसडीएम, डीएमओ और सीओ शामिल है. मामला अंतर्राजीय है. क्योंकि सीमा बंगाल से सटी हुई है. इसलिए अब बंगाल सरकार से पत्राचार किया जाएगा. उसके बाद कार्वाई की जा सकती है.
- वहीं Loktantra19.com को डीएमओ राजेश कुमार ने बताया कि जी हां एसडीएम की तरफ से मेरे पास फाइल आयी थी. फाइल अब डीसी के टेबल पर है. क्योंकि फाइल मेरे पास नहीं है, इसलिए इस मामले पर ज्यादा जानकारी मैं नहीं दे सकता. ऐसे में अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जब अवैध खनन की पुष्टि हो चुकी है तो पाकुड़ प्रशासन मौन क्यों है. क्यों नहीं फाइन या फिर एफआईआर की कार्रवाई प्रशासन की तरफ से की जा रही है. कहीं बड़ा जुर्माना लीपापोती की वजह तो नहीं. या फिर मोहम्मद अली खान उर्फ मुर्तुजा खान और टुटुल खान पर प्रशासन कार्रवाई नहीं करना चाहता. इन्हें प्रशासन की तरफ से संरक्षण प्राप्त है.
नोट : इस मामले पर संवादाता ने डीसी पाकुड़ से बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन रीसिव नहीं किया.
